Chinese Hackers Target Telecom Giants in Long-Term Espionage Campaign

ब्रिटिश सरकारी संचार में सेंध: वैश्विक टेलीकॉम नेटवर्क पर चीनी साइबर-जासूसी अभियान का खुलासा

Team The420
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ब्रिटेन की सरकार के सबसे संवेदनशील संचार तंत्र से जुड़े मोबाइल फोन एक व्यापक वैश्विक साइबर-जासूसी अभियान के तहत हैक किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घुसपैठ कथित तौर पर चीन से जुड़े हैकर समूहों द्वारा की गई, जिससे पश्चिमी लोकतंत्रों की राजनीतिक और रणनीतिक संचार सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिपोर्टों में कहा गया है कि हमलावरों ने डाउनिंग स्ट्रीट से जुड़े दूरसंचार नेटवर्क तक पहुँच बना ली थी। इसके परिणामस्वरूप कॉल इंटरसेप्ट करने, टेक्स्ट संदेश पढ़ने और उपयोगकर्ताओं की लोकेशन ट्रैक करने की क्षमता हासिल होने की आशंका जताई गई है। यह साइबर घुसपैठ केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिका और ‘फाइव आइज़’ खुफिया गठबंधन के अन्य सदस्य देशों को भी निशाना बनाया गया।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने वर्ष 2024 में पहली बार अपने सहयोगी देशों को सतर्क किया था, जब यह सामने आया कि कई देशों की टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क में राज्य-समर्थित हैकर समूहों की मौजूदगी बनी हुई है। खुफिया आकलनों के अनुसार, इन साइबर हमलों की शुरुआत कम से कम 2021 में हो चुकी थी, लेकिन उनके वास्तविक दायरे का खुलासा बाद के वर्षों में हुआ।

टेलीकॉम नेटवर्क तक “निरंतर और व्यापक” पहुँच

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों को टेलीकॉम नेटवर्क तक “व्यापक और निरंतर” पहुँच प्राप्त थी। इसके जरिए वे बिना किसी स्पष्ट संकेत के फोन कॉल सुनने और लाखों लोगों की भौगोलिक स्थिति का पता लगाने में सक्षम थे। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में पश्चिमी संचार प्रणालियों पर हुए सबसे गंभीर साइबर हमलों में से एक माना जा रहा है।

ब्रिटिश मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह सेंध “सीधे डाउनिंग स्ट्रीट के दिल तक” पहुँची थी। आशंका जताई जा रही है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और स्टाफ द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल फोन भी इस हमले से प्रभावित हो सकते हैं। इस खुलासे के बाद राजनीतिक संचार को सुरक्षित रखने को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

कई देशों को एक साथ निशाना

विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान एक साथ कई सरकारों को निशाना बना रहा था। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूज़ीलैंड के टेलीकॉम नेटवर्क भी इसकी चपेट में बताए जा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर इसलिए आकर्षक लक्ष्य बनता है क्योंकि इसके माध्यम से विशाल मात्रा में मेटाडेटा और रियल-टाइम कम्युनिकेशन तक सीधी पहुँच संभव हो जाती है।

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इन खुलासों के बाद 2024 में अमेरिकी संघीय एजेंसियों ने टेलीकॉम कंपनियों को नेटवर्क सुरक्षा मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह दी थी। इसका उद्देश्य न केवल मौजूदा घुसपैठ को समाप्त करना था, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना भी था।

‘सॉल्ट टाइफून’ से जुड़ा अभियान

अगस्त 2025 में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा एक संयुक्त साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि चीनी राज्य-प्रायोजित साइबर अभिनेता वैश्विक स्तर पर टेलीकॉम नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं। इस गतिविधि को साइबर सुरक्षा उद्योग में ‘सॉल्ट टाइफून’ नामक समूह से जोड़ा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सॉल्ट टाइफून वैश्विक साइबर-जासूसी जगत के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है। हालांकि सार्वजनिक चर्चा का केंद्र अमेरिका रहा है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इस समूह की गतिविधियाँ यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका तक फैली हुई हैं, जहां टेलीकॉम कंपनियों, सरकारी संस्थानों और तकनीकी फर्मों को निशाना बनाया गया।

रणनीतिक नुकसान का आकलन

ब्रिटेन में अब यह आकलन किया जा रहा है कि क्या इस लंबे समय तक चले साइबर अभियान के दौरान कोई संवेदनशील राजनीतिक बातचीत या रणनीतिक जानकारी लीक हुई। चीन पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और इन्हें निराधार बताता आया है। हालांकि पश्चिमी देशों का कहना है कि हमलों का पैमाना और तकनीकी जटिलता ऐसे संसाधनों की ओर इशारा करती है, जो केवल संगठित और रणनीतिक उद्देश्य वाले अभिनेताओं के पास होते हैं।

डाउनिंग स्ट्रीट से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई है, लेकिन अब तक कोई विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला टेलीकॉम सुरक्षा मानकों को और सख्त करने तथा सरकारी संचार प्रणालियों की व्यापक समीक्षा की मांग को तेज करेगा।

यह घटना इस बात का संकेत मानी जा रही है कि नागरिक बुनियादी ढांचा अब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक नया मोर्चा बन चुका है, जहां टेलीकॉम नेटवर्क सरकारों और समाज के भीतर झांकने का प्रभावी साधन बनते जा रहे हैं।

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