वैधानिक खुलासे बिना लिस्टिंग को भ्रामक माना, DoT-WPC मंजूरी अनिवार्य; बिक्री केवल अधिकृत एजेंसियों तक सीमित

ऑनलाइन एंटी-ड्रोन और GPS जैमर की बिक्री पर सख्ती; CCPA ने छह कंपनियों को नोटिस भेजा

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By Roopa
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संवेदनशील सिग्नल-जैमिंग उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के जरिए छह कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है। इन पर एंटी-ड्रोन सिस्टम, ड्रोन जैमर और GPS जैमर जैसे प्रतिबंधित उपकरणों को आवश्यक कानूनी जानकारी के बिना सूचीबद्ध कर बेचने का आरोप है।

जांच में सामने आया कि कई लिस्टिंग में लाइसेंस, नियामकीय मंजूरी और उपयोग संबंधी प्रतिबंधों का उल्लेख नहीं था। इससे उपभोक्ताओं में यह गलत धारणा बन सकती है कि ऐसे उपकरण सामान्य रूप से खरीदे और इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि इन पर कड़े कानूनी नियंत्रण लागू हैं।

नोटिस में जिन कंपनियों के नाम शामिल हैं, उनसे आयात लाइसेंस, खरीद स्रोत, नियामकीय स्वीकृतियां, पिछले दो वर्षों में बेची गई इकाइयों की संख्या, खरीदारों का विवरण और लिस्टिंग हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है।

भारत के वायरलेस नियामकीय ढांचे के तहत सिग्नल-जैमिंग उपकरण भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 के अंतर्गत सख्ती से नियंत्रित श्रेणी में आते हैं। इनके उपयोग या बिक्री के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति और वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (WPC) विंग से प्रमाणन, जिसमें इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) शामिल है, आवश्यक होता है। व्यवहारिक रूप से ऐसे उपकरण केवल अधिकृत सरकारी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक सीमित रहते हैं क्योंकि ये संचार नेटवर्क और नेविगेशन सिस्टम को बाधित कर सकते हैं।

प्राधिकरण के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार कई लिस्टिंग में न तो अनिवार्य स्वीकृतियों का उल्लेख था और न ही यह चेतावनी दी गई थी कि बिना अनुमति ऐसे उपकरण रखना या उपयोग करना गैरकानूनी है। इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार का प्रथम दृष्टया मामला माना गया है, क्योंकि कानून के अनुसार उपभोक्ताओं को पूर्ण और सही जानकारी देना अनिवार्य है।

यह मामला उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत ऑनलाइन मार्केटप्लेस की जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करता है। नियमों के अनुसार प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके पोर्टल पर सूचीबद्ध उत्पाद सभी लागू कानूनों का पालन करते हों। प्रतिबंधित वस्तुओं की लिस्टिंग रोकना, आवश्यक नियामकीय जानकारी प्रदर्शित करना और वैधता की जांच करना उनकी जिम्मेदारी है। ऐसा न करने पर प्लेटफॉर्म के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है और गैर-अनुपालन सामग्री हटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

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अधिकारियों के मुताबिक जैमिंग उपकरणों की खुली उपलब्धता सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम पैदा करती है। ये उपकरण विमानन प्रणालियों, आपातकालीन संचार, GPS-आधारित नेविगेशन और महत्वपूर्ण अवसंरचना नेटवर्क में बाधा डाल सकते हैं। इसलिए इनका अनियंत्रित उपयोग केवल उपभोक्ता हित का नहीं बल्कि आंतरिक सुरक्षा का भी विषय बन जाता है।

यह कार्रवाई डिजिटल मार्केटप्लेस पर सख्त निगरानी की व्यापक नीति की ओर संकेत करती है, खासकर उन श्रेणियों में जहां डुअल-यूज या संवेदनशील तकनीक शामिल है। हाल के महीनों में वायरलेस ट्रांसमीटर और निगरानी उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री पर भी नियामकों ने जांच बढ़ाई है और यह स्पष्ट किया है कि प्लेटफॉर्म केवल थर्ड-पार्टी विक्रेताओं की मेजबानी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का परिणाम ई-कॉमर्स इंटरमीडियरी के लिए अनुपालन का महत्वपूर्ण मानक तय कर सकता है। यदि उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित कंपनियों पर जुर्माना, उत्पाद डीलिस्टिंग और भविष्य में नियंत्रित श्रेणियों में लिस्टिंग पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाई हो सकती है।

उपभोक्ताओं के लिए यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि ऑनलाइन दिखाई देने वाला हर उत्पाद कानूनी रूप से खरीदने योग्य नहीं होता। नियामक ने सलाह दी है कि वायरलेस या सिग्नल-ट्रांसमिशन से जुड़े उपकरण खरीदने से पहले यह जांच लेना चाहिए कि उसके लिए सरकारी अनुमति आवश्यक है या नहीं।

सरकार का यह कदम दोहरे उद्देश्य को दर्शाता है—एक ओर भ्रामक डिजिटल लिस्टिंग से उपभोक्ताओं की सुरक्षा और दूसरी ओर संचार नेटवर्क को बाधित करने वाली तकनीकों को केवल अधिकृत उपयोग तक सीमित रखना। डिजिटल वाणिज्य के विस्तार के साथ अब दूरसंचार, वायरलेस और उपभोक्ता कानूनों के अनुपालन की निगरानी और कड़ी होने के संकेत हैं।

आगे की कार्रवाई कंपनियों द्वारा दिए गए जवाबों पर निर्भर करेगी। यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला या नियमों का उल्लंघन साबित हुआ तो कड़े प्रवर्तन उपाय किए जा सकते हैं, जिससे यह संदेश स्पष्ट होगा कि ऑनलाइन बाजार में उत्पाद उपलब्धता के साथ-साथ नियामकीय पालन भी उतना ही अनिवार्य है।

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