साइबर अपराध में म्यूल बैंक खातों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने राज्यभर में बैंक कर्मचारियों और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ऑपरेटरों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार पिछले दो वर्षों में म्यूल खातों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और इनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन तथा मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा है।
EOU के मुताबिक हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब एंड सिंध बैंक के एक शाखा प्रबंधक सहित 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि फर्जी केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए 13 खातों के जरिए ₹1,084 करोड़ के लेनदेन किए गए। हालांकि इस नेटवर्क का मुख्य केंद्र पंजाब बताया जा रहा है, लेकिन इसके तार बिहार तक जुड़े होने की आशंका के बाद राज्य की एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है।
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EOU के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा रही है और जनता से भी सहयोग की अपील की गई है। लोगों को कमीशन या आसान पैसे के लालच में दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने या अपने खाते किसी और को इस्तेमाल करने देने से बचने की सलाह दी गई है।
हाल के दिनों में पटना में केनरा बैंक के एक सहायक प्रबंधक और एक्सिस बैंक के एक अधिकारी को म्यूल खाते उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बैंककर्मी साइबर गिरोहों को ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम से बचने के तरीके तक बता रहे थे, जिससे संदिग्ध गतिविधियां “रेड फ्लैग” में न आएं।
EOU सूत्रों के अनुसार ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय CSC ऑपरेटरों के साथ मिलकर साइबर अपराधी बड़ी संख्या में म्यूल खाते खुलवा रहे हैं। इन खातों का उपयोग ऑनलाइन ठगी की रकम को जल्दी-जल्दी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ट्रेसिंग से बचने के लिए किया जाता है।
राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को 616 संदिग्ध म्यूल खातों के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। EOU की त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक करीब ₹107 करोड़ की राशि रोकी जा चुकी है, जबकि लगभग ₹8 करोड़ पीड़ितों को वापस कराई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि म्यूल खातों पर नियंत्रण साइबर ठगी के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यही खाते ठगी की रकम को निकालने और आगे भेजने की कड़ी होते हैं। आने वाले दिनों में बैंकिंग ऑडिट, केवाईसी सत्यापन और डिजिटल ट्रांजैक्शन की निगरानी और सख्त की जाएगी।
EOU ने चेतावनी दी है कि यदि किसी व्यक्ति का खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल पाया गया तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, भले ही उसने खाते का उपयोग किसी और को करने दिया हो। एजेंसी ने लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध बैंकिंग गतिविधियों की तुरंत सूचना देने की अपील की है।
