बेंगलुरु: साइबर क्राइम पुलिस ने ₹70.85 लाख की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम को एक बैंक खाते के जरिए रूट करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई राज्यभर में चलाए जा रहे म्यूल खातों के खिलाफ विशेष अभियान का हिस्सा है।
जांच के अनुसार, आरोपी ने अपने परिचित के माध्यम से एक व्यक्ति के चालू खाते की जानकारी — नेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड और लिंक मोबाइल नंबर — व्हाट्सऐप पर दिसंबर 2025 में हासिल की। उसने खाते का उपयोग विदेशी यात्रा और एडवेंचर गतिविधियों के खर्च के लिए करने का भरोसा दिया और टैक्स व जीएसटी खुद जमा करने का वादा किया।
पुलिस ने बताया कि बाद में खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर बदल दिया गया और 3 फरवरी 2026 को खाते के जरिए कुल ₹70,85,137 का लेनदेन किया गया। यह रकम साइबर फ्रॉड की कमाई होने की आशंका है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से मिले इनपुट के आधार पर साइबर क्राइम अधिकारी सत्यापन के लिए शिकायतकर्ता के घर पहुंचे। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) और 319(2) के तहत केस दर्ज किया है।
राज्यभर में म्यूल खातों पर शिकंजा
यह मामला कर्नाटक साइबर कमांड द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसमें म्यूल खातों और उन्हें संचालित करने वाले संगठित नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। ऐसे खाते ठगी की रकम को तेजी से रिसीव, लेयर और ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
दिसंबर 2025 से अब तक:
- 869 म्यूल बैंक खाते चिन्हित
- 8,788 शिकायतें NCRP पर लिंक
- ₹85.05 करोड़ की संदिग्ध रकम का पता
- ₹13.43 करोड़ की राशि होल्ड
जांच में सामने आया कि म्यूल हैंडलर अनजान लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम या रिश्तेदारों के नाम से कई खाते खुलवाते हैं और उन्हें एक समानांतर वित्तीय नेटवर्क की तरह चलाते हैं।
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गिरफ्तारियां और बरामदगी
अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 68 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 32 सर्च वारंट लेकर 35 जगहों पर छापे मारे।
छापों में बरामद:
- 68 एटीएम कार्ड
- 32 पासबुक
- 35 मोबाइल फोन
- 37 चेक बुक
- 28 सिम कार्ड
- अन्य आपत्तिजनक सामग्री
अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क का संचालन एक व्यवस्थित बिज़नेस मॉडल की तरह किया जा रहा था, जो कई साइबर ठगी मॉड्यूल को सपोर्ट करता था।
आम लोगों के लिए चेतावनी
पुलिस ने कहा कि कई लोग अनजाने में बैंक डिटेल, ओटीपी, सिम कार्ड या दस्तावेज साझा कर साइबर अपराध की कड़ी बन जाते हैं। म्यूल खाते के रूप में इस्तेमाल होने पर खाते के धारक को कानूनी कार्रवाई, खाता फ्रीज और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
लोगों से अपील की गई है कि किसी को भी नेट बैंकिंग लॉगिन, ओटीपी, सिम या बैंक एक्सेस न दें और संदिग्ध मांगों की तुरंत शिकायत करें।
साइबर कमांड ने कहा कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और ठगी के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।
