लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत अनी बुलियन ट्रेडर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों की चार संपत्तियां जब्त कर ली हैं। जब्त संपत्तियों में तीन अचल और एक चल संपत्ति शामिल है, जो लखनऊ, दिल्ली और उत्तरकाशी में स्थित बताई गई हैं। इनकी कुल कीमत लगभग ₹7.30 करोड़ आंकी गई है।
ईडी इससे पहले कंपनी के प्रबंध निदेशक अजीत कुमार गुप्ता, उनकी पत्नी आईएफएस अधिकारी निहारिका सिंह और अन्य के नाम से करीब ₹16.40 करोड़ की संपत्तियां अटैच कर चुकी है। एजेंसी की जांच अभी जारी है और दस्तावेजों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मामला निवेशकों से कथित रूप से ₹110 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने लुभावनी निवेश योजनाओं का झांसा देकर बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाई और बाद में उसे विभिन्न कंपनियों और सहकारी संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया। निवेशकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज कई एफआईआर के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की थी।
जांच में सामने आया कि अनी ग्रुप ने निवेशकों से जुटाई गई राशि को अपनी कई सहयोगी कंपनियों और एक क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से घुमाया। इसी पैसे से अनी बुलियन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर विभिन्न स्थानों पर जमीन खरीदी गई। ईडी के अनुसार इन कंपनियों का संचालन एक ही समूह द्वारा किया जा रहा था।
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इससे पहले ईडी लखनऊ, अमेठी और दिल्ली में 20 संपत्तियां जब्त कर चुकी है। अब तक की कार्रवाई में बैंक की एफडी समेत कई वित्तीय दस्तावेज भी अटैच किए गए हैं, जो कथित तौर पर निवेशकों की रकम से जुड़े बताए जा रहे हैं।
उधर, इसी मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करोड़ों रुपये हड़पने के आरोप में एक कंपनी की अतिरिक्त निदेशक मंजू उपाध्याय उर्फ मंजू दुबे को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ 2017 में आलमबाग थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसकी जांच बाद में ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई थी। इस केस में अब तक छह आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि सात की तलाश जारी है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि निवेशकों से ली गई रकम के लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है, ताकि मनी ट्रेल पूरी तरह स्थापित की जा सके।
ईडी ने निवेशकों से अपील की है कि यदि उन्होंने संबंधित कंपनियों में निवेश किया है तो वे अपने दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएं। एजेंसी का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर निवेशकों के हितों की रक्षा की जाएगी।
