अलीगढ़ | जिले में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बदलते पैटर्न के साथ सामने आ रहे हैं। हालिया शिकायतों में चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ितों को न तो कोई ओटीपी आया, न किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक हुआ—फिर भी खातों से लाखों रुपये कट गए। इन मामलों ने बैंकिंग सुरक्षा, मोबाइल नंबर मर्जिंग स्कैम और ग्राहक–बैंक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच में अगर ग्राहक की गलती साबित नहीं होती, तो सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों के तहत बैंक की जिम्मेदारी तय हो सकती है।
पिछले कुछ दिनों में साइबर थाने में दर्ज शिकायतों के मुताबिक, ठग ‘साइलेंट डेबिट’ तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पद्धति में खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को कॉल या एसएमएस मर्जिंग जैसे तरीकों से नियंत्रित कर लिया जाता है। नतीजा यह कि खाते से रकम निकल जाती है, लेकिन ग्राहक के फोन पर न तो ओटीपी आता है, न ही लेनदेन का तात्कालिक अलर्ट। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों बाद बैंक संदेश मिलने पर कटौती का पता चला।
जांच एजेंसियों का कहना है कि हर शिकायत की फॉरेंसिक जांच की जा रही है—कहां, कब और कैसे मोबाइल नंबर या अकाउंट एक्सेस हुआ, यह ट्रेस किया जा रहा है। साथ ही संबंधित बैंकों से समानांतर आंतरिक जांच भी कराई जा रही है। नियमों के मुताबिक, यदि जांच में यह स्पष्ट हो जाता है कि ग्राहक की ओर से कोई चूक नहीं हुई, तो बैंक बीमा या आंतरिक सुरक्षा तंत्र के जरिए प्राथमिकता के आधार पर राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू करता है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि ऐसे ‘नो-फॉल्ट’ मामलों का अनुपात सीमित होता है।
ताजा दर्ज मामलों की तस्वीर
देहली गेट क्षेत्र के एक व्यक्ति के खाते से 24 जनवरी को अचानक ₹2.70 लाख कट गए। बाद में संदेश आने पर लेनदेन का पता चला।
सिविल लाइंस इलाके के एक खाताधारक के साथ 26 जनवरी को ऑनलाइन लेनदेन के दौरान तीन ट्रांजैक्शन में ₹1 लाख की कटौती हुई।
एक अन्य मामले में क्रेडिट कार्ड से दो बार में ₹1.13 लाख निकल गए।
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यूपीआई के जरिए बिना जानकारी ₹2.98 लाख की कटौती का मामला भी दर्ज हुआ।
एक खाताधारक के खाते से 7 जनवरी को ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए ₹6.96 लाख उड़ा लिए गए।
फिक्स्ड डिपॉज़िट खाते से तीन किस्तों में करीब ₹3 लाख निकलने की शिकायत भी सामने आई।
इन घटनाओं के बीच निवेश के नाम पर बड़ी ठगी का एक अलग मामला भी उजागर हुआ है। क्वार्सी क्षेत्र के निवासी ने शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर ₹25 लाख ठगे जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, काव्या गोडबोले नामक महिला के कॉल के बाद पीड़ित को आकर्षक रिटर्न का वादा किया गया। बाद में एक ग्रुप से जोड़ा गया, जहां नियमित ‘मार्केट अपडेट’ साझा किए जाते थे। भरोसा दिलाने के लिए एक कथित एग्रीमेंट दिखाया गया और अलग-अलग खातों में कई बार रकम ट्रांसफर कराई गई। जब पैसे वापस मांगे गए तो अनुषा नामक महिला ने किसी भी करार से इनकार कर दिया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या करें, कैसे बचें
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, संदिग्ध कॉल, निवेश ऑफर या अचानक ऐप/नेटवर्क समस्या दिखे तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। खाते, यूपीआई और कार्ड्स पर ट्रांजैक्शन लिमिट तय रखें, मोबाइल सिम स्वैप अलर्ट सक्रिय रखें और किसी भी अनजान ग्रुप या ‘गारंटीड रिटर्न’ के दावे से दूर रहें।
निष्कर्ष
अलीगढ़ में उभरते ‘नो-ओटीपी’ फ्रॉड ने यह साफ कर दिया है कि ठग तकनीक से एक कदम आगे हैं। ऐसे में त्वरित रिपोर्टिंग, सख्त जांच और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप बैंक जवाबदेही ही पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।
