16 से 20 फरवरी तक भारत में आयोजित होने जा रहे एआई-इम्पैक्ट समिट में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और लगभग 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष इसमें भाग लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सम्मेलन के लिए देशों का चयन रणनीतिक, तकनीकी प्रासंगिकता और जिम्मेदार एआई विकास के साझा दृष्टिकोण के आधार पर किया गया है।
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि भारत ने उन देशों को प्राथमिकता दी है जो सुरक्षित, पारदर्शी और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के पक्षधर हैं। इसी कारण दक्षिण एशिया के कुछ पड़ोसी देशों को आमंत्रण मिला है, लेकिन पाकिस्तान इस सूची में शामिल नहीं है। एक अधिकारी ने कहा कि समिट का उद्देश्य वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है, इसलिए उन्हीं देशों को बुलाया गया है जिनकी एआई पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भूमिका है।
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यह सम्मेलन एआई के उपयोग की वैश्विक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले यूके, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में हुए सम्मेलनों में मुख्य रूप से नियामकीय ढांचे और जोखिम प्रबंधन पर चर्चा हुई थी, जबकि भारत का जोर एआई को विकास, समावेशन और सतत प्रगति के उपकरण के रूप में उपयोग करने पर रहेगा।
समिट का केंद्रीय ढांचा ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ पर आधारित रखा गया है। इसके तहत जीवन के सात चक्रों के संतुलन की अवधारणा के आधार पर सात थीमैटिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें एआई नीति, नवाचार, नैतिकता, साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। सम्मेलन में सरकारों, टेक कंपनियों, स्टार्ट-अप, शिक्षाविदों और बहुपक्षीय संगठनों की भागीदारी होगी।
सूत्रों के मुताबिक समिट के दौरान प्रधानमंत्री कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें सेमीकंडक्टर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई अनुसंधान और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेगा। भारत इस मंच का उपयोग ग्लोबल साउथ के लिए सुलभ और किफायती एआई समाधान विकसित करने की दिशा में साझेदारी बढ़ाने के लिए करना चाहता है।
सम्मेलन में एआई के जिम्मेदार उपयोग, एल्गोरिदमिक पारदर्शिता, बायस कम करने और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी मंथन होगा। साथ ही रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक उपयोग के मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे।
उद्योग जगत की भागीदारी को लेकर भी व्यापक तैयारियां की गई हैं, हालांकि एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन्सेन हुआंग ने अपना प्रस्तावित भारत दौरा रद्द कर दिया है। इसके बावजूद कई वैश्विक टेक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट भारत को एआई शासन और नीति निर्धारण के वैश्विक विमर्श में अग्रणी भूमिका दिला सकता है। भारत पहले ही डिजिटल पब्लिक गुड्स, आधार-आधारित सेवाओं और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर तकनीक के उपयोग का मॉडल पेश कर चुका है, जिसे एआई के साथ जोड़कर विकासशील देशों के लिए नए अवसर बनाए जा सकते हैं।
समिट के निष्कर्षों के आधार पर एक साझा घोषणापत्र जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें जिम्मेदार एआई के लिए वैश्विक मानक, डेटा सुरक्षा के सिद्धांत और तकनीकी सहयोग के रोडमैप को शामिल किया जा सकता है। इसे भविष्य में एआई गवर्नेंस के बहुपक्षीय ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
