नई दिल्ली। दिल्ली के एक कारोबारी अधिकारी की कथित हत्या की जांच में ₹1.2 करोड़ की धोखाधड़ी और ग्रेटर नोएडा की करीब ₹4 करोड़ की संपत्ति से जुड़े अलग-अलग विवाद सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मृतक को इन कथित वित्तीय गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं और क्या इन विवादों का उसकी मौत की परिस्थितियों से कोई संबंध हो सकता है। हालांकि, अब तक दोनों मामलों और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
₹1.2 करोड़ की कथित ठगी का मामला अगस्त में संसद मार्ग थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने की थी, जो मामले में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी का पुराना सहपाठी बताया गया है। शिकायत के मुताबिक, सितंबर 2024 से उसे कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का डर दिखाया गया।
आरोप है कि दोनों आरोपियों ने खुद को उच्च स्तर के सरकारी संपर्क वाला बताते हुए शिकायतकर्ता को मामला निपटाने में मदद का भरोसा दिया। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम से कथित तौर पर फर्जी नोटिस और धनशोधन रोकथाम कानून, स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ कानून तथा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून से जुड़े मामलों का हवाला दिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने अपनी बचत, कर्ज और परिवार के सदस्यों से उधार लेकर ₹1.2 करोड़ से अधिक की रकम दी। इसमें बड़ी राशि एक आरोपी के बैंक खाते में भेजे जाने का आरोप है। बाद में उससे कथित तौर पर ₹26 करोड़ और मांगे गए। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने दावा किया कि उसकी ओर से ₹13.8 करोड़ सरकारी एजेंसियों को दिए जा चुके हैं। जांच में कथित दबाव वाले संदेश की भी पड़ताल की जा रही है।
इसी बीच ग्रेटर नोएडा की करीब ₹4 करोड़ कीमत वाली संपत्ति को लेकर भी विवाद जांच के घेरे में आया है। यह मामला गिरफ्तार आरोपियों में से एक, उसकी अलग रह रही पत्नी और दूसरी आरोपी महिला से जुड़ा बताया गया है। आरोपी की अलग रह रही पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत भी दर्ज कराई थी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
मृतक और दोनों आरोपियों ने पहले एक रियल एस्टेट कंपनी में साथ काम किया था। जांच के मुताबिक, एक आरोपी को कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते कंपनी से हटाया गया था। इसी दौरान सामने आए पुराने वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। एक आरोपी ने पूछताछ में दावा किया है कि उसने मृतक को करीब ₹1 करोड़ दिए थे, लेकिन रकम वापस नहीं की गई। जांच एजेंसियां इस दावे, लेनदेन की वास्तविक प्रकृति और उसका अन्य वित्तीय विवादों से संभावित संबंध सत्यापित कर रही हैं।
जांच में मृतक को ले जाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल की गई एसयूवी की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। जांच के अनुसार, 6 सितंबर को वाहन को उस आवासीय परिसर में ले जाया गया था, जहां एक आरोपी महिला रहती थी। सीसीटीवी फुटेज में अगले दिन वाहन को वहां से निकलते और परिसर के पास एक स्थान पर खड़ा किए जाने की बात सामने आई है। वाहन 8 सितंबर तक वहीं रहा।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, 8 सितंबर को मृतक का शव गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक नाले में कथित तौर पर फेंका गया और अगले दिन आरोपी शहर से बाहर चले गए। शव 10 सितंबर को बरामद हुआ। परिवार का आरोप है कि उन्हें शव बरामद होने की जानकारी नहीं दी गई और अज्ञात शव के रूप में 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मृतक 6 सितंबर को गुरुग्राम में पूर्व सहकर्मी से मिलने गया था। इसके बाद उसकी हत्या की परिस्थितियों को लेकर जांच शुरू हुई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गुरुग्राम पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। रिपोर्ट और हत्या से जुड़े अन्य दस्तावेज दिल्ली पुलिस को सौंपे जाने की प्रक्रिया में हैं।
जांच एजेंसियां पोस्टमार्टम और फोरेंसिक दस्तावेजों के आधार पर मौत का कारण तथा घटनाक्रम स्पष्ट करने की कोशिश कर रही हैं। कथित हत्या किस तरीके से की गई, इसकी पूरी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है।
