मुंबई। करीब ₹50 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक को शनिवार को विशेष सीबीआई अदालत ने जमानत दे दी। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को ऋण सुविधा मंजूर करने और बाद में उसका अनुमोदन करने के दौरान बैंक के निर्धारित दिशानिर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया।
विशेष न्यायाधीश पीबी घुगे के आदेश के अनुसार, सीबीआई ने 9 मार्च 2020 को यूनियन बैंक के तत्कालीन उप महाप्रबंधक की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। जांच एक्सेल मेटल प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के निदेशकों ने चार कथित आपूर्तिकर्ता कंपनियों के पक्ष में छह लेटर ऑफ क्रेडिट खुलवाए थे। इन कथित आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने यूको बैंक से वित्तीय सहायता लेकर बिलों को भुनाया। आरोप है कि इसके बाद इन लेनदेन से प्राप्त रकम को सहयोगियों और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए दूसरी जगह भेजा गया।
पूर्व बैंक अधिकारी का नाम शुरुआती आरोपपत्र में शामिल नहीं था। बाद में सीबीआई ने उनके खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। एजेंसी का आरोप था कि ऋण सुविधाएं जारी करने और बाद में उन्हें मंजूरी देने के दौरान बैंक के नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना शाखा प्रमुख के माध्यम से लेटर ऑफ क्रेडिट जारी करवाए। मामले में अन्य आरोपियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए जमानत की मांग की। वकीलों ने अदालत को बताया कि पूर्व बैंक अधिकारी ने जांच में सहयोग किया, जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया और अदालत से समन मिलने के बाद वह उसके समक्ष पेश हुए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर अपराध बताया। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि लेटर ऑफ क्रेडिट, ऋण सुविधाओं और जमानत के तौर पर रखी गई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज वित्तीय संस्थानों से पहले ही जब्त किए जा चुके हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी जांच में शामिल रहे हैं।
अदालत ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, खासकर ऐसी स्थिति में जब आरोपी को जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया हो और वह जांच एजेंसी के सामने उपलब्ध रहा हो, मुकदमे के दौरान उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करने वाली शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है।
यह मामला यूनियन बैंक में करीब ₹150 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़े तीन सीबीआई मामलों में से एक है। जांच एजेंसी इससे पहले बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न कंपनियों और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए हासिल रकम के कथित दुरुपयोग और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
