चंडीगढ़ में कंपनी के MD की पहचान का इस्तेमाल कर WhatsApp के जरिए करीब ₹2 करोड़ की कथित ठगी के मामले में साइबर पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

चंडीगढ़ में ₹2 करोड़ के व्हाट्सऐप बॉस स्कैम का खुलासा, साइबर पुलिस ने तीन और आरोपियों को पकड़ा

Team The420
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चंडीगढ़। साइबर अपराध पुलिस ने कंपनी के खाते से करीब ₹2 करोड़ की कथित ठगी के मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला व्हाट्सऐप के जरिए कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी से रकम दूसरे बैंक खाते में स्थानांतरित कराने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, जांच अब ठगी की रकम के पूरे लेनदेन, अंतिम लाभार्थियों और नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों तक पहुंचने पर केंद्रित है।

मामले में 17 अप्रैल 2026 को शिवालिक एन्क्लेव, चंडीगढ़ निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता की कंपनी को कथित तौर पर व्हाट्सऐप आधारित पहचान की नकल कर ठगी का निशाना बनाया गया। आरोप है कि जालसाज ने कंपनी के खाते अधिकारी से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया और खुद को कंपनी का एमडी बताया। इसके लिए एमडी की प्रोफाइल तस्वीर का इस्तेमाल किया गया।

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पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने खाते अधिकारी को एक बैंक खाते में रकम स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। यह खाता उत्तर प्रदेश के नोएडा में संचालित बताया गया है। निर्देश को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का आदेश समझकर रकम स्थानांतरित की गई, जिसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के माध्यम से आगे बढ़ाए जाने की आशंका है।

जांच के दौरान पुलिस ने अब तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी ने दूसरे व्यक्ति के माध्यम से अपना बैंक खाता कथित तौर पर ठगों को उपलब्ध कराया। इस खाते में ठगी की रकम में से करीब ₹3 लाख प्राप्त हुए। आरोप है कि खाते से पूरी रकम चेक के जरिए निकाली गई और कमीशन के बदले ठगों को सौंप दी गई।

दूसरे आरोपी पर कथित तौर पर बैंक खाता उपलब्ध कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, उसने पहले भी अपना बैंक खाता किसी अन्य साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए उपलब्ध कराया था। आरोप है कि उस मामले में भी रकम निकालकर कमीशन के बदले ठगों तक पहुंचाई गई।

तीसरे गिरफ्तार आरोपी पर भी बैंक खाता हासिल कर उसे कथित तौर पर जालसाजों तक पहुंचाने और दोनों पक्षों के बीच संपर्क कराने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि उसने भी पहले अपने बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरे साइबर अपराध से प्राप्त रकम के लिए कराया था। कथित तौर पर रकम निकालने के बाद उसे ठगों को सौंप दिया गया था।

इस मामले में इससे पहले 17 अगस्त को दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, इन दोनों की गिरफ्तारी उस लाभार्थी खाते और कंपनी की जांच के दौरान हुई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम के लेनदेन में किया गया था। अब तक की कार्रवाई से पुलिस को मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और रकम के आगे बढ़ने की कड़ियों के बारे में जानकारी मिलने की बात कही गई है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनी से निकाली गई रकम आखिर किन खातों में पहुंची और उसके अंतिम लाभार्थी कौन हैं। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों के बीच हुई बातचीत की जानकारी की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही अलग-अलग स्तरों पर इस्तेमाल किए गए खातों की पहचान की जा रही है।

साइबर पुलिस को आशंका है कि ठगी की रकम को कई खातों के जरिए आगे बढ़ाकर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया गया हो सकता है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा इसी रकम के पूरे प्रवाह को जोड़ना है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य कंपनियों या लोगों को भी निशाना बनाया था।

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