चार साल में 2 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का अनुमान; बिना मान्यता चल रहे संस्थान में फर्जी परीक्षा, मार्कशीट और डिग्री का खेल, 54 छात्र चालू सत्र में भी पंजीकृत मिले

खेतों के बीच चल रही थी फर्जी मेडिकल यूनिवर्सिटी, ₹300 दिहाड़ी वाले कर्मचारी को बनाया ‘प्रोफेसर’; प्रबंधक समेत 5 गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
6 Min Read

एटा। उत्तर प्रदेश के एटा में खेतों के बीच करीब 14 कमरों की इमारत में चार साल से संचालित कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मारहरा क्षेत्र में चल रहे ‘बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी’ के पास किसी नियामक संस्था या विश्वविद्यालय की मान्यता नहीं थी, इसके बावजूद छात्रों को मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले का झांसा देकर लाखों रुपये वसूले जा रहे थे। पुलिस ने कॉलेज प्रबंधक समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी पहचान पत्र, प्रवेश फॉर्म, उपस्थिति पत्रक, फीस रसीदें, प्रश्नपत्र, परीक्षा पुस्तिकाएं, अंकपत्र और डिग्री से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं।

पूरे फर्जीवाड़े की परतें उस समय खुलनी शुरू हुईं, जब कॉलेज प्रबंधक ने अपने कथित अपहरण की कहानी रचकर छात्रों पर दबाव बनाने की कोशिश की। 16 सितंबर की सुबह करीब सात बजे महमूदपुर नगरिया निवासी रामसेवक ने पुलिस हेल्पलाइन पर सूचना दी कि उसके भाई और कॉलेज प्रबंधक सतेंद्र कुमार उर्फ कृष्णपाल को तीन अज्ञात लोग कॉलेज से अगवा कर ले गए हैं और दो लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और चार टीमें लगाई गईं।

सर्विलांस से प्रबंधक की लोकेशन आगरा में मिली। पुलिस जब वहां पहुंची और उसे बरामद किया तो पूछताछ में कथित अपहरण की कहानी संदिग्ध निकली। जांच के मुताबिक, कॉलेज में दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों ने जब संस्थान की मान्यता पर सवाल उठाते हुए अपनी फीस वापस मांगी तो उन्हें आगरा में रकम लौटाने का भरोसा दिया गया। प्रबंधक उनके साथ आगरा पहुंचा। आरोप है कि वहां उसने छात्रों के मोबाइल फोन से अपने भाई को फोन करवाकर दो लाख रुपये मंगाने का दबाव बनाया और पूरे मामले को अपहरण का रूप देने की कोशिश की, ताकि छात्रों को मुकदमे में फंसाने का डर दिखाकर मामला दबाया जा सके।

जांच में सामने आया कि यह संस्थान वर्ष 2022 से मारहरा ब्लॉक के महमूदपुर नगरिया गांव के पास खेतों के बीच बनी इमारत से संचालित किया जा रहा था। इमारत में करीब 14 कमरे थे, लेकिन नियमित शैक्षणिक व्यवस्था और प्रयोगशाला जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलीं। आरोपियों ने छात्रों को प्रभावित करने के लिए संस्थान को पद्मावद कॉलेज, हाथरस, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और मोनार्ड यूनिवर्सिटी से संबद्ध बताने का दावा किया था। इसके लिए कथित तौर पर मनगढ़ंत विश्वविद्यालय कोड भी तैयार किए गए थे।

कॉलेज की वास्तविकता तब सामने आई, जब वहां पढ़ने वाली एक छात्रा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययनरत अपने परिचित को संस्थान के बारे में बताया। छात्र ने विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड और वेबसाइट पर जानकारी तलाश की, लेकिन बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। विश्वविद्यालय से संपर्क करने के बाद भी संस्थान की संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद छात्रों के बीच भी संस्थान की मान्यता को लेकर सवाल उठने लगे।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी अलग-अलग जिलों में जाकर युवाओं और उनके परिवारों को मेडिकल तथा पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले का भरोसा देता था। एटा के अलावा कासगंज, फिरोजाबाद, हाथरस और अलीगढ़ में भी प्रचार किया जाता था। एएनएम और जीएनएम पाठ्यक्रम के लिए प्रति सेमेस्टर करीब 30 हजार रुपये, बीएससी नर्सिंग के लिए करीब एक लाख रुपये तथा बी.फार्मा और डी.फार्मा के नाम पर 1.25 लाख से दो लाख रुपये तक लिए जाते थे। चार वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का अनुमान है। चालू सत्र में भी 54 छात्र पंजीकृत पाए गए।

फर्जीवाड़े का अगला चरण परीक्षा और प्रमाणपत्रों से जुड़ा था। आरोप है कि प्रवेश के बाद प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिकाएं, परीक्षा प्रक्रिया, अंकपत्र और डिग्री तक तैयार की जाती थीं। कॉलेज से मिले दस्तावेजों ने इस व्यवस्था की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कॉलेज के नाम में ‘बीएस’ भगवान दास के नाम से लिया गया था। भगवान दास धरपसी निवासी चाय विक्रेता बताया गया है। वहीं संस्थान को सामाजिक और प्रशासनिक रसूख देने के लिए सेवानिवृत्त सीएमओ के बेटे गौरव अग्रवाल को संचालन से जोड़ा गया था। कागजों में फैकल्टी के रूप में दर्ज 75 वर्षीय मोहम्मद शरीफ कुरैशी से पूछताछ में सामने आया कि वह शिक्षक नहीं, बल्कि चपरासी के रूप में काम करता था और उसे महज 300 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी दी जाती थी। नरेंद्र उर्फ पप्पू का नाम भी कागजों में फैकल्टी के रूप में दर्ज था।

पुलिस ने पीड़ित छात्र की शिकायत पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। कॉलेज से 16 फर्जी पहचान पत्र, आवेदन फॉर्म, हाजिरी शीट, फीस रसीदें, परीक्षा पुस्तिकाएं, जाली प्रश्नपत्र, फर्जी अंकपत्र, मुहर लगे लेटर पैड, प्रचार सामग्री, लैपटॉप और चार बैंकों के चेक बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, पांचों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। पहले दर्ज धोखाधड़ी के मामलों की समीक्षा के साथ कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

हमसे जुड़ें

Share This Article