चंदोपाला में असली मालिकों की जानकारी के बिना जमीन बेचने का आरोप; पहचान बदलकर रजिस्ट्री कराने और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच, परिवार ने खुद आरोपी को छत्तीसगढ़ से पकड़कर पुलिस को सौंपा था

नुआपाड़ा में 4.40 एकड़ जमीन फर्जीवाड़े में ब्रोकर गिरफ्तार, अब तक 9 आरोपी पकड़े गए

Roopa
By Roopa
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नुआपाड़ा। ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में चंदोपाला जमीन फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने एक और जमीन ब्रोकर को गिरफ्तार किया है। शनिवार को कोमना पुलिस ने आरोपी कोमना क्षेत्र के रहने वाले 56 वर्षीय व्यक्ति को पकड़ा। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर 4.40 एकड़ जमीन की कथित फर्जी बिक्री में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है।

मामला कोमना तहसील के चंदोपाला क्षेत्र की जमीन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, यह जमीन वास्तविक मालिकों के नाम थी, लेकिन उनकी जानकारी और अनुमति के बिना इसे बेच दिया गया। आरोप है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए असली मालिकों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा किया गया। इन लोगों ने कथित तौर पर मालिकों की पहचान अपनाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया।

फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब वास्तविक मालिक ने धान खरीद से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के दौरान जमीन के रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी हासिल की। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनकी जमीन पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम बेची जा चुकी है। इसके बाद मामले की शिकायत की गई और कोमना थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी तत्कालीन उप-पंजीयक-सह-तहसीलदार की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर जमीन की फर्जी बिक्री में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें वह व्यक्ति भी शामिल है जिस पर जमीन के वास्तविक मालिक की पहचान अपनाकर रजिस्ट्री कराने का आरोप है। एक अन्य महिला को मालिक की बहन बनकर पेश किए जाने का आरोप है। इसके अलावा दो कथित जमीन ब्रोकरों को भी गिरफ्तार किया गया था।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

पुलिस ने बाद में मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कथित मुख्य साजिशकर्ता और दो जमीन ब्रोकर शामिल थे। इसके बाद 16 सितंबर को 51 वर्षीय एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। शनिवार को हुई नई गिरफ्तारी के साथ ही मामले में गिरफ्तारियों की संख्या नौ हो गई है।

जांच के दौरान इस मामले में एक असामान्य घटनाक्रम भी सामने आया। वास्तविक जमीन मालिक और उसके परिवार ने पुलिस कार्रवाई में कथित देरी का आरोप लगाते हुए एक आरोपी को खुद तलाशने की कोशिश शुरू की। परिवार के सदस्यों ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ तक उसका पीछा किया और उसे वहां से पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। यह घटनाक्रम सामने आने के बाद जमीन फर्जीवाड़े की जांच और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि 4.40 एकड़ जमीन की बिक्री के लिए जाली दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए, फर्जी पहचान वाले लोगों की व्यवस्था किसने की और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जमीन की कथित अवैध बिक्री से किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह को आर्थिक लाभ मिला था या नहीं।

मामले में अब तक हुई नौ गिरफ्तारियों के आधार पर पुलिस कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ जमीन के दस्तावेज, पहचान संबंधी रिकॉर्ड और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

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