व्हाट्सऐप ग्रुप, नकली SEBI सर्टिफिकेट और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट से जाल; प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और रकम मांगते ही खुला खेल

₹7 करोड़ के फर्जी मुनाफे का झांसा, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹36 लाख की साइबर ठगी

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद: ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर एक युवक से ₹36.30 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। नागोले निवासी 35 वर्षीय पीड़ित को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया, जहां उसे कुछ ही दिनों में ₹7 करोड़ का मुनाफा दिखाकर और पैसे निवेश करने के लिए उकसाया गया। रकम निकालने की कोशिश करते ही ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा गया, जिसके बाद धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

शिकायत के अनुसार, पीड़ित 30 जनवरी 2026 को ट्रेडिंग अवसर तलाशते समय ‘Barclays’ नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप एडमिन नियमित रूप से ट्रेडिंग टिप्स, मुनाफे के स्क्रीनशॉट और कथित SEBI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट साझा कर भरोसा बनाने की कोशिश करते थे। इसके बाद खुद को आधिकारिक ट्रेडर बताने वाली एक महिला ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क किया और एक ट्रेडिंग वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा।

पीड़ित ने शुरुआत में ₹50,000 निवेश किए। वेबसाइट पर तुरंत मुनाफा दिखने लगा, जिससे उसका भरोसा बढ़ा। उसे ‘इंस्टीट्यूशनल स्टॉक्स’ और IPO में निवेश के नाम पर बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया। एक सप्ताह के भीतर उसने कई किश्तों में कुल ₹36,35,010 जमा कर दिए। प्लेटफॉर्म पर खाते में करीब ₹7 करोड़ का मुनाफा दिखाया गया, जिससे वह और अधिक निवेश करने के लिए तैयार हो गया।

हालांकि, जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने मुनाफे का दो प्रतिशत ‘प्रोसेसिंग चार्ज’ देने की शर्त रख दी। यहीं उसे संदेह हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि पीड़ित को कुल निवेश के बदले सिर्फ ₹5,000 वापस मिले, जबकि शेष ₹36,30,010 की ठगी हो गई।

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मलकाजगिरी साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट, व्हाट्सऐप ग्रुप और अलग-अलग मोबाइल नंबरों के जरिए संगठित तरीके से ठगी की गई। आरोपियों ने भरोसा बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंक का नाम, नकली दस्तावेज और मुनाफे के फर्जी आंकड़े इस्तेमाल किए।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक यह तरीका हाल के महीनों में तेजी से बढ़ा है, जिसमें पीड़ित को पहले छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाया जाता है और फिर बड़ी रकम लगवाई जाती है। रकम निकालने के समय टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या सुरक्षा शुल्क के नाम पर और पैसा मांगा जाता है, लेकिन भुगतान के बाद भी निकासी नहीं होती।

पुलिस ने निवेशकों को सलाह दी है कि किसी भी व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में दी जा रही ट्रेडिंग सलाह पर भरोसा न करें, केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म और SEBI पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से ही निवेश करें और संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है ताकि रकम फ्रीज कराई जा सके।

मामले को संगठित साइबर निवेश ठगी का हिस्सा मानते हुए पुलिस डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क का पता लगाकर अन्य पीड़ितों की भी पहचान की जाएगी।

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