लुधियाना: संगठित साइबर वित्तीय अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए खन्ना पुलिस ने देशभर में फैले ₹78.05 करोड़ के फ्रॉड से जुड़े नौ आदतन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह रकम 31 बैंक खातों के जरिए घुमाई गई और कम से कम 200 शिकायतों से इसका लिंक सामने आया है। जांच में पता चला कि ये खाते “लेयर-1” म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे, जिनमें पीड़ितों से ठगी की रकम पहले जमा होती थी और फिर उसे आगे कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लुधियाना के सोनू कुमार और राजन, मंडी गोबिंदगढ़ के विक्की परशाद और रामधन, राजस्थान के जोधपुर के गोपाल, दिल्ली की आलिया अहमद, पश्चिम बंगाल के बर्धमान के सुमित कुमार झा और खन्ना के मलन राय के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह स्थानीय स्तर पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें देशभर में किए गए साइबर फ्रॉड की रकम को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल करता था।
जांच की शुरुआत पिछले साल 2 सितंबर को मिली 53 शिकायतों से हुई, जिनमें संदिग्ध म्यूल खातों का जिक्र था। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और 14C डाटा के विश्लेषण से पता चला कि खन्ना जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं में खोले गए खातों से बड़े पैमाने पर फ्रॉड ट्रांजेक्शन हुए हैं। सभी चिन्हित खातों को 1930 साइबर हेल्पलाइन सिस्टम पर फ्रीज कर दिया गया।
इसके बाद खन्ना साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत नया मुकदमा दर्ज किया गया। डिजिटल ट्रांजेक्शन ट्रेल, केवाईसी दस्तावेज, सिम लिंक और निकासी पैटर्न के विश्लेषण से पुलिस को अंतरराज्यीय नेटवर्क का लिंक मिला।
जांच में सामने आया कि पांच मुख्य आरोपी 31 खातों के जरिए ₹78.05 करोड़ की रकम घुमाने में सक्रिय भूमिका में थे। इनमें कथित सरगना आलिया अहमद के खिलाफ अकेले 129 शिकायतें दर्ज हैं और उस पर ₹41.74 करोड़ की ठगी का आरोप है। सुमित कुमार झा 32 शिकायतों और ₹16 करोड़ की रकम से जुड़ा है, जबकि राजन 27 शिकायतों और ₹16.92 करोड़ के फ्रॉड से संबंधित पाया गया। अन्य आरोपी खाते खुलवाने, नकद निकासी और फंड ट्रांसफर कराने में सहयोग करते थे।
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पुलिस के अनुसार ये खाते फ्रॉड चेन के प्राथमिक रिसीविंग पॉइंट थे, जिन्हें लेयर-1 म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनमें पीड़ितों से पैसा आने के तुरंत बाद उसे सेकेंडरी खातों, वॉलेट या नकद निकासी के जरिए आगे भेज दिया जाता था, ताकि ऑडिट ट्रेल छिप सके। छोटे शहरों की बैंक शाखाओं और स्थानीय लोगों के जरिए खाते खुलवाने का मकसद शुरुआती जांच से बचना था।
इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ है कि NCRP पर शिकायतों का समेकित विश्लेषण कर अलग-अलग राज्यों के मामलों को एक ही वित्तीय नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है। पुलिस ने ट्रांजेक्शन पैटर्न, अकाउंट क्लस्टरिंग और बेनिफिशियरी मैपिंग के जरिए बिखरी हुई शिकायतों के बीच संबंध स्थापित किए।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से जब्त डिजिटल डिवाइस की जांच की जा रही है, ताकि अन्य लाभार्थियों, संचार चैनलों और संभावित कॉल सेंटर आधारित फ्रॉड लिंक का पता लगाया जा सके। मनी ट्रेल के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
पुलिस ने बैंकों से नए खातों की केवाईसी प्रक्रिया मजबूत करने और ऐसे खातों की निगरानी बढ़ाने की अपील की है, जिनमें अचानक बड़ी रकम आती है और तुरंत निकाली जाती है। शाखा स्तर पर म्यूल गतिविधि की समय रहते पहचान को बड़े पैमाने पर फ्रॉड रोकने के लिए अहम बताया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। अब ₹78.05 करोड़ से अधिक की संभावित लेनदेन की भी जांच की जा रही है और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर शिकायतों का मिलान तथा पीड़ितों को राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
