बेंगलुरु: साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक शहरवासी से 63.30 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को Data Protection Board of India और Mumbai Police का अधिकारी बताकर कार्रवाई की धमकी दी और वीडियो कॉल के जरिए कथित पूछताछ का नाटक रचा। पुलिस ने बताया कि 7 से 16 फरवरी के बीच पीड़ित ने अपने और पत्नी के खातों से रकम ट्रांसफर की।
केंद्रीय डिवीजन के साइबर क्राइम थाने में 19 फरवरी को दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़ित को पहले एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने दावा किया कि उसके खिलाफ डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के जरिए कार्रवाई चल रही है। आरोप लगाया गया कि पीड़ित के नाम पर 20 मोबाइल “लोडिंग” डिवाइस रजिस्टर्ड हैं और जांच में सहयोग नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
कुछ ही देर बाद ‘सुदीप’ नाम बताने वाले व्यक्ति ने दो अलग-अलग नंबरों से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया। वीडियो कॉल के दौरान उसने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। पुलिस के मुताबिक, कॉल के दौरान वर्दी जैसे परिधान और आधिकारिक बैकड्रॉप दिखाकर भरोसा पैदा करने की कोशिश की गई।
डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 7 से 16 फरवरी के बीच अपने South Indian Bank खाते और पत्नी के Bank of Baroda खातों से रकम ट्रांसफर की। यह धनराशि क्रमशः Yes Bank, Karur Vysya Bank और ICICI Bank के खातों में भेजी गई। कुल मिलाकर 63.30 लाख रुपये अलग-अलग किश्तों में स्थानांतरित हुए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह तरीका हाल के महीनों में बढ़ा है, जिसमें ठग खुद को केंद्रीय एजेंसियों, पुलिस या नियामक निकायों का अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देते हैं। पीड़ितों से कहा जाता है कि उनका आधार, सिम कार्ड या बैंक खाते किसी अवैध गतिविधि से जुड़े हैं, और जांच के नाम पर उन्हें वीडियो कॉल पर घंटों रोके रखा जाता है। इस दौरान उनसे गोपनीय जानकारी और पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं।
जांच के तहत ट्रांजैक्शन डिटेल्स खंगाली जा रही हैं और जिन खातों में रकम गई, उन्हें चिन्हित कर फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस ने आम नागरिकों को आगाह किया है कि कोई भी वैधानिक एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की पूछताछ नहीं करती, न ही “तुरंत पैसे ट्रांसफर” करने का निर्देश देती है।
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कैसे बचें ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी से
- किसी भी अज्ञात कॉल पर खुद को पुलिस/नियामक बताने वाले व्यक्ति की बात पर तुरंत भरोसा न करें।
- वीडियो कॉल पर दिखाए गए पहचान पत्र या वर्दी को प्रमाण न मानें।
- किसी भी जांच के नाम पर बैंक डिटेल्स, ओटीपी या रकम ट्रांसफर न करें।
- संदेह होने पर कॉल काटकर संबंधित एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट/हेल्पलाइन से सत्यापन करें।
- तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर त्वरित निर्णय लेने को मजबूर करते हैं। “डर” इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार है। बेंगलुरु पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी कॉल की सूचना तुरंत दें, ताकि धनराशि को समय रहते रोका जा सके और गिरोह तक पहुंच बनाई जा सके।
मामले की जांच जारी है।
