भूमि अधिग्रहण में भारी कमी, आवास लक्ष्य अधूरे और राजस्व वसूली में ढिलाई प्रमुख कारण

जीडीए में अफसरों की लापरवाही से ₹469 करोड़ का नुकसान: सीएजी रिपोर्ट में खुलासा

Roopa
By Roopa
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लखनऊ/गाजियाबाद: नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को वर्ष 2017–18 से 2021–22 के बीच ₹469 करोड़ का नुकसान होने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार यह नुकसान प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के खराब क्रियान्वयन के कारण हुआ। यह रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई, जिसमें भूमि अधिग्रहण, आवास निर्माण और राजस्व वसूली में गंभीर खामियां सामने आईं।

ऑडिट में पाया गया कि जीडीए को इस अवधि में आवासीय और औद्योगिक विकास के लिए 300 हेक्टेयर भूमि की व्यवस्था करनी थी, लेकिन केवल 18.32 हेक्टेयर ही अधिग्रहित की जा सकी। मकानों की बिक्री बेहद कम रही और कई योजनाओं में एक से पांच प्रतिशत तक ही बिक्री हुई। वर्ष 2017 से 2022 के बीच विकसित भूखंडों में भी मात्र 11 से 50 प्रतिशत तक ही आवंटन हुआ। रिपोर्ट में नीलामी और “पहले आओ पहले पाओ” योजनाओं में अनियमितताओं का भी उल्लेख है, जहां पिछली नीलामी में बचे भूखंडों को आगे की आवंटन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।

दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आवास निर्माण लक्ष्य भी अधूरा रहा। 25,000 मकानों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 9,960 मकान बनाए गए, जो कुल लक्ष्य का 40 प्रतिशत है। इंटीग्रेटेड और हाईटेक टाउनशिप योजनाओं में बिल्डरों को 20 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आवास बनाना था, लेकिन मार्च 2022 तक 6,382 के मुकाबले केवल 2,133 मकान बने और बिल्डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी प्रदर्शन कमजोर रहा। 45,000 मकानों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 20,173 मकान पूरे किए गए, जबकि मार्च 2024 तक 5,801 मकान निर्माणाधीन थे, जिससे योजनाओं में लगातार देरी का संकेत मिलता है।

वित्तीय प्रबंधन में भी कई गंभीर कमियां पाई गईं। नौ बचत खातों में ऑटो-स्वीप सुविधा का उपयोग न करने से ₹73.87 करोड़ के ब्याज का नुकसान हुआ, जबकि बकाया ऋण पर ब्याज न लेने से ₹64.27 करोड़ की हानि हुई। बिल्डरों से ₹21.86 करोड़ प्रशासनिक प्रभार, भूमि मूल्य और भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की वसूली नहीं की गई।

ठेकेदारों को ₹23.91 करोड़ का अनियमित भुगतान किया गया और अधूरे कार्यों पर ₹105.58 करोड़ खर्च कर दिए गए। 422 आवंटियों पर ₹154.02 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिभार नहीं लगाया गया। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास शुल्क और मानचित्र शुल्क कम लगाने से ₹25.69 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया।

सीएजी रिपोर्ट ने परियोजना क्रियान्वयन, राजस्व वसूली और नियामकीय निगरानी में प्रणालीगत कमजोरियों की ओर संकेत किया है। रिपोर्ट में बिल्डरों की सख्त मॉनिटरिंग, वित्तीय नियंत्रण मजबूत करने और समय पर भूमि अधिग्रहण सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है, ताकि शहरी आवास और औद्योगिक विकास के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।

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