कागजी फर्म GST जाल: आजमगढ़ में ₹1.97Cr धोखाधड़ी—सिविल लाइंस पते पर बोगस बर्तन व्यापार।

सिविल लाइंस के पते पर कागजी फर्म से ₹1.97 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी, मालिक पर केस

Team The420
4 Min Read

सिविल लाइंस के पते पर कागजों में चल रही एक बोगस फर्म के जरिए ₹1.97 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की जांच में खुलासा हुआ कि जिस पते पर फर्म पंजीकृत थी, वहां कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं थी। इसके बाद नगर कोतवाली में फर्म स्वामी आयुष कुमार राय के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कर चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

विभागीय तहरीर के अनुसार 4 नवंबर 2025 को ऑनलाइन जीएसटी पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन में फर्म का नाम ‘बालाजी इंटरप्राइजेज’ और व्यापार का प्रकार बर्तनों की खरीद-बिक्री बताया गया। मुख्य व्यवसाय स्थल गोरखपुर-वाराणसी मार्ग स्थित सिविल लाइंस दर्शाया गया और पते के प्रमाण के रूप में बिजली का बिल अपलोड किया गया।

Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology

पंजीकरण मिलने के बाद फर्म ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹10.98 करोड़ की सप्लाई घोषित की और ₹1.97 करोड़ की जीएसटी देयता दिखाई। बाद में जांच में सामने आया कि न तो उक्त पते पर कोई दुकान या गोदाम था और न ही कोई व्यापार संचालित हो रहा था। पंजीकरण में दिया गया मोबाइल नंबर भी बंद मिला।

बिजली बिल की जांच में पता चला कि कनेक्शन नंबर देवरिया जिले का है और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी है, जिससे स्पष्ट हुआ कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी नंबर हासिल किया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया है, जिसमें कागजी कारोबार दिखाकर कर चोरी की गई।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस फर्जी फर्म का इस्तेमाल या तो फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए किया गया या बिना माल आपूर्ति के फर्जी बिल जारी कर अन्य कारोबारियों को लाभ पहुंचाया गया। इस तरह की शेल फर्में जीएसटी नेटवर्क में टर्नओवर बढ़ाकर और कर देयता में हेरफेर कर राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं।

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न, इनवॉइस ट्रेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि धन के प्रवाह और संभावित सहयोगियों का पता लगाया जा सके। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसी पहचान या दस्तावेजों से अन्य जिलों में भी पंजीकरण कराया गया था।

विभाग ने फर्म का जीएसटी नंबर ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आगे किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो। साथ ही पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने वाले मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था का दुरुपयोग कर कागजी फर्में बनाना संगठित जीएसटी धोखाधड़ी का सामान्य तरीका बन गया है। इसे रोकने के लिए भौतिक सत्यापन, डेटा विश्लेषण और अंतरजिला समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।

पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है और उसके वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी बिलिंग के जरिए अन्य फर्मों को टैक्स क्रेडिट का लाभ तो नहीं दिया गया।

यह मामला दर्शाता है कि न्यूनतम दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए कागजी कारोबार किस तरह बड़े राजस्व नुकसान का कारण बन सकते हैं। विभाग ने संकेत दिया है कि ऐसी फर्जी इकाइयों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article