अहमदाबाद: मनोवैज्ञानिक दबाव और डिजिटल प्रतिरूपण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 83 वर्षीय रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी को कथित तौर पर ₹42.50 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। साइबर ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर नकली “CBI जांच” और फर्जी कोर्टरूम का नाटक रचकर उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाने और रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
शिकायत उनके बेटे चैतन्य चंदेल, निवासी सैटेलाइट, ने दर्ज कराई, जब बैंक अधिकारियों को एक और ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगा और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। यह पूरी वारदात 8 से 10 दिसंबर के बीच हुई और फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस इसकी जांच कर रही है।
एफआईआर के अनुसार, बुजुर्ग अधिकारी को पहले एक कॉल आया जिसमें खुद को टेलीकॉम विभाग का कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके मोबाइल नंबर के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं और मामला मुंबई स्थित CBI यूनिट को भेजा गया है।
इसके बाद उन्हें व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉलर ने अपना नाम प्रदीप कुमार बताते हुए खुद को CBI अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि नरेश गोयल नाम के व्यक्ति ने उनके खाते में ₹20 लाख ट्रांसफर किए हैं और वे मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में हैं।
विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ठगों ने एक और वीडियो कॉल कराया, जिसमें एक व्यक्ति जज की वेशभूषा में दिखा और कथित कोर्ट की कार्यवाही जैसा माहौल बनाया गया। फर्जी “जज” ने कहा कि उनके खिलाफ 27 केस दर्ज हैं और परिवार को जानकारी देना गोपनीय CBI जांच में बाधा माना जाएगा।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित को रोज़ कई-कई घंटे वीडियो कॉल पर रखा गया, घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने के निर्देश दिए गए। गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी की धमकी देकर उन्हें मानसिक रूप से डराया गया—यह तरीका तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” ठगी में आम होता जा रहा है।
ठगों ने उनसे लिखित घोषणा पत्र तैयार करवाया कि वे किसी भी गलत काम में शामिल नहीं हैं और उसकी फोटो व बैंक डिटेल्स व्हाट्सऐप पर भेजने को कहा।
9 दिसंबर को पीड़ित की पत्नी ने इस्कॉन के पास एक निजी बैंक शाखा में एफडी तुड़वाकर ₹21.24 लाख RTGS के जरिए उस YES बैंक खाते में ट्रांसफर किए, जो ठगों ने दिया था। उन्हें बताया गया कि रकम RBI द्वारा वेरिफाई कर वापस कर दी जाएगी।
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अगले दिन आनंदनगर स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक में दूसरी एफडी तुड़वाकर ₹21.25 लाख उसी खाते में भेजे गए। दो दिनों में कुल ₹42.50 लाख ट्रांसफर हो गए।
11 दिसंबर को जब परिवार ने एक और निकासी की कोशिश की तो बैंक अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई और औपचारिक एफआईआर लिखी गई।
जांच में सामने आया है कि ठगों ने पीड़ित के फोन से कॉल लॉग और चैट रिकॉर्ड डिलीट करवा दिए, जिससे डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश का संकेत मिलता है।
अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस लाभार्थी बैंक खाते, ट्रांजैक्शन ट्रेल और IP लॉग की जांच कर रही है ताकि ऑपरेटिव और म्यूल अकाउंट्स का पता लगाया जा सके।
साइबर क्राइम अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तेजी से फैल रहे “डिजिटल अरेस्ट” मॉडल से मेल खाता है, जिसमें खासकर वरिष्ठ नागरिकों को अलग-थलग कर डराकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी जांच एजेंसी व्हाट्सऐप कॉल पर पूछताछ नहीं करती, परिवार से बात करने से नहीं रोकती और न ही वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।
लोगों से अपील की गई है कि ऐसे कॉल तुरंत काटें, परिवार को बताएं और राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें ताकि नुकसान रोका जा सके।
