नई दिल्ली: वैश्विक वित्तीय बाजार में प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर को लेकर चिंता बढ़ गई है, जब Blue Owl Capital ने अपने प्राइवेट क्रेडिट फंड OBDC II से जुड़े करीब ₹11,600 करोड़ के एसेट बेचने के साथ ही तिमाही रिडंप्शन रोकने का फैसला किया। इस कदम ने लिक्विडिटी को लेकर आशंकाएं पैदा कर दीं और निवेशकों को अपने पैसे की निकासी पर रोक का सामना करना पड़ा, जिससे पूरे सेक्टर में सतर्कता बढ़ गई।
करीब ₹25.5 लाख करोड़ की परिसंपत्ति प्रबंधन वाली यह वैकल्पिक एसेट मैनेजमेंट कंपनी गैर-बैंकिंग प्राइवेट लोन में निवेश करती है। ये लोन पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर स्टार्टअप, मिड-साइज कंपनियों और प्राइवेट इकाइयों को दिए जाते हैं। हालिया घटनाक्रम ने इस तेजी से बढ़ते बाजार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि एसेट पेंशन और इंश्योरेंस निवेशकों को लगभग 99.7% पार वैल्यू पर बेचे गए, यानी वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। इसके बावजूद रिडंप्शन रोकने के फैसले को बाजार ने लिक्विडिटी दबाव के संकेत के रूप में लिया। किसी भी फंड में निकासी पर रोक निवेशकों के भरोसे को प्रभावित करती है और यही कारण है कि इस कदम का असर एक कंपनी से निकलकर पूरे प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर पर पड़ा।
खबर के बाद कंपनी का शेयर एक ही दिन में करीब 9% गिर गया और दो साल के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। पिछले एक वर्ष में इसमें लगभग 50% की गिरावट आ चुकी है। असर अन्य बड़े प्राइवेट क्रेडिट खिलाड़ियों तक भी फैल गया, जहां प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशक इस घटना को सेक्टर-व्यापी जोखिम के रूप में देख रहे हैं।
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इस संकट की जड़ सॉफ्टवेयर सेक्टर में आई वैल्यूएशन गिरावट को माना जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बदलावों के कारण कई सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल और कमाई अनुमानों पर दबाव आया, जबकि Blue Owl के लोन पोर्टफोलियो में इस सेक्टर का एक्सपोजर था। वैल्यूएशन पर सवाल उठते ही निवेशकों की चिंता बढ़ी और निकासी की मांग तेज हो गई।
प्राइवेट क्रेडिट बाजार का आकार वैश्विक स्तर पर लगभग ₹150 लाख करोड़ बताया जाता है और यह पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप, स्मॉल और मिड-साइज कंपनियों के लिए फंडिंग का बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। यदि इस सेक्टर में लिक्विडिटी को लेकर आशंका बढ़ती है, तो लोन वितरण धीमा पड़ सकता है, जिससे नई परियोजनाओं, विस्तार योजनाओं और रोजगार सृजन पर असर पड़ने की संभावना है।
निवेशकों के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। जोखिम बढ़ने की स्थिति में पूंजी वैकल्पिक एसेट से निकलकर सार्वजनिक ऋण साधनों या सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जा सकती है। इससे जोखिम लेने की क्षमता घटेगी और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया अधिक हो सकती है और यदि अन्य फंड में रिडंप्शन दबाव नहीं बढ़ता तो मामला सीमित रह सकता है। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या अन्य प्राइवेट क्रेडिट फंड भी इसी तरह के कदम उठाते हैं या लिक्विडिटी सामान्य बनी रहती है।
व्यापक अर्थव्यवस्था पर असर का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्राइवेट लेंडिंग कितनी प्रभावित होती है। यदि फंडिंग की उपलब्धता घटती है, तो विशेष रूप से टेक स्टार्टअप और मिड-साइज कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना कठिन हो सकता है।
फिलहाल स्थिति ‘वॉच मोड’ में है, लेकिन यह घटनाक्रम तेजी से बढ़ते प्राइवेट क्रेडिट बाजार के लिए चेतावनी संकेत माना जा रहा है। निवेशक लिक्विडिटी, सेक्टर एक्सपोजर और फंड संरचना पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जबकि नियामकीय निगरानी बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
