नई दिल्ली: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स कंप्लायंस को मजबूत करने के लिए देशभर के करोड़ों टैक्सपेयर्स को “NUDGE” नोटिस भेजने शुरू किए हैं। यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि एडवाइजरी अलर्ट है, जिसका उद्देश्य आयकर रिटर्न (ITR) और विभाग के पास उपलब्ध वित्तीय डेटा के बीच पाए गए अंतर को स्वयं ठीक करने का अवसर देना है। उन्नत रिस्क एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रोफाइलिंग और थर्ड-पार्टी डेटा के जरिए ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है जहां आय, निवेश या खर्च का विवरण मेल नहीं खाता।
NUDGE का पूरा अर्थ Non-intrusive Usage of Data to Guide & Enable है। विभाग इसे “ट्रस्ट-बेस्ड कंप्लायंस मॉडल” का हिस्सा बता रहा है, जिसमें पहले टैक्सपेयर्स को स्वैच्छिक सुधार का मौका दिया जाता है और उसके बाद ही औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू होती है।
किन मामलों में भेजे जा रहे नोटिस
सूत्रों के अनुसार इस अभियान का फोकस मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग पर है, खासकर वे व्यक्ति जिनकी सालाना आय ₹50 लाख से अधिक है या जो कंपनियों में वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर कार्यरत हैं। इसके अलावा निम्न स्थितियों में भी नोटिस भेजे जा रहे हैं:
- AIS और ITR में आय का अंतर
- हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन का खुलासा न होना
- गलत डिडक्शन या छूट का दावा
- विदेशी संपत्तियों या निवेश की अधूरी जानकारी
- शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या बैंकिंग डेटा में मिसमैच
AIS (Annual Information Statement), बैंक खातों, टीडीएस, निवेश प्लेटफॉर्म, स्टॉक मार्केट लेनदेन और अन्य वित्तीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी का मिलान कर सिस्टम स्वतः ऐसे मामलों को फ्लैग करता है।
नोटिस मिलने पर क्या करें
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि NUDGE नोटिस मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अंतिम नोटिस नहीं होता। सही प्रक्रिया इस प्रकार है:
- अपने ITR और AIS का विस्तृत मिलान करें
- गलती मिलने पर रिवाइज्ड या अपडेटेड ITR दाखिल करें
- अतिरिक्त टैक्स और ब्याज तुरंत जमा करें
- सभी सपोर्टिंग दस्तावेज सुरक्षित रखें
समय रहते सुधार करने से स्क्रूटनी, पेनल्टी और ब्याज से बचा जा सकता है और मामला आगे की जांच में जाने से रुक सकता है।
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क्या नहीं करना चाहिए
- नोटिस को नजरअंदाज करना
- बिना जांच के जल्दबाजी में जवाब देना
- गलत या अधूरी जानकारी जमा करना
ऐसा करने पर मामला जोखिम श्रेणी में चला जाता है और फिर नियमित स्क्रूटनी या दंडात्मक कार्रवाई शुरू हो सकती है।
डेटा-ड्रिवन टैक्स सिस्टम की ओर बदलाव
यह पहल टैक्स प्रशासन के डिजिटल और डेटा-इंटीग्रेटेड मॉडल की दिशा में बड़ा कदम है। नवंबर 2024 में शुरू हुए पहले अभियान में विदेशी संपत्तियों का खुलासा न करने वाले मामलों को टारगेट किया गया था, जिसके बाद हजारों टैक्सपेयर्स ने अपने रिटर्न अपडेट किए थे। अब इसका दायरा बढ़ाकर डिडक्शन मिसमैच, हाई-वैल्यू खर्च और निवेश डेटा तक कर दिया गया है।
विभाग का मानना है कि डिजिटल ट्रेल, पैन-आधारित डेटा इंटीग्रेशन और एआई एनालिटिक्स के कारण आय छिपाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। इसलिए स्वैच्छिक सुधार ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
टैक्सपेयर्स के लिए संदेश
NUDGE नोटिस को चेतावनी के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। समय रहते ITR को सही करना न केवल भविष्य की जांच से बचाता है बल्कि अतिरिक्त ब्याज और पेनल्टी के जोखिम को भी कम करता है।
कुल मिलाकर, यह पहल टैक्स प्रशासन में एआई और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है, जहां स्वैच्छिक अनुपालन को प्राथमिकता दी जा रही है और टैक्सपेयर्स को पहले सुधार का मौका दिया जा रहा है।
