अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान में 651 आरोपियों की गिरफ्तारी और ₹35.7 करोड़ (लगभग 4.3 मिलियन डॉलर) से अधिक की वसूली की गई है। यह कार्रवाई INTERPOL और 16 अफ्रीकी देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से की गई।
ऑपरेशन रेड कार्ड 2.0 नामक यह अभियान 8 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 के बीच चलाया गया। यह कार्रवाई अफ्रीकन जॉइंट ऑपरेशन अगेंस्ट साइबरक्राइम (AFJOC) के तहत की गई, जिसका उद्देश्य हाई-यील्ड निवेश घोटालों, मोबाइल मनी फ्रॉड, फिशिंग, पहचान की चोरी और फर्जी मोबाइल लोन एप्लिकेशन से जुड़े आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना था।
इस अभियान में शामिल देशों में Nigeria, Kenya, Angola, Benin, Cameroon, Côte d’Ivoire, Chad, Gabon, Gambia, Ghana, Namibia, Rwanda, Senegal, Uganda, Zambia और Zimbabwe शामिल थे।
₹374 करोड़ का कुल नुकसान उजागर
इंटरपोल के अनुसार, आठ सप्ताह चले इस अभियान में ऐसे घोटालों का खुलासा हुआ, जिनसे जुड़े वित्तीय नुकसान की राशि ₹374 करोड़ (लगभग 45 मिलियन डॉलर) से अधिक है। कुल 1,247 पीड़ितों की पहचान की गई, जिनमें अधिकांश अफ्रीकी देशों के थे, हालांकि कुछ अन्य क्षेत्रों के नागरिक भी प्रभावित हुए।
कार्रवाई के दौरान 2,341 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—जैसे लैपटॉप और स्मार्टफोन—जब्त किए गए। साथ ही 1,442 दुर्भावनापूर्ण आईपी एड्रेस, डोमेन और सर्वर बंद किए गए, जिससे आपराधिक डिजिटल ढांचे को बड़ा झटका लगा।
नाइजीरिया: निवेश घोटाला और टेलीकॉम सेंध
नाइजीरिया में अधिकारियों ने एक हाई-यील्ड निवेश धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो युवाओं को फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, पहचान चोरी और फर्जी डिजिटल एसेट निवेश योजनाओं के जरिए ठगी के लिए भर्ती करता था। इस दौरान 1,000 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए गए।
एक अन्य मामले में, छह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने एक प्रमुख टेलीकॉम कंपनी के आंतरिक सिस्टम में कर्मचारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर सेंध लगाई। आरोप है कि गिरोह ने बड़ी मात्रा में एयरटाइम और मोबाइल डेटा चुराकर अवैध रूप से बेच दिया।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
केन्या: फर्जी निवेश डैशबोर्ड के जरिए ठगी
केन्या में 27 लोगों को एक संगठित ऑनलाइन निवेश घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने मैसेजिंग ऐप्स, सोशल मीडिया, फर्जी प्रशंसापत्र और पेशेवर दिखने वाले डैशबोर्ड का उपयोग कर पीड़ितों को ऊंचे मुनाफे का लालच दिया।
पीड़ितों को नकली अकाउंट स्टेटमेंट दिखाकर भरोसा दिलाया गया, लेकिन जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो उन्हें ब्लॉक कर दिया गया।
कोट द’ईवोआर: फर्जी मोबाइल लोन एप का जाल
कोट द’ईवोआर में 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 240 मोबाइल फोन, 25 लैपटॉप और 300 से अधिक सिम कार्ड जब्त किए।
यह गिरोह फर्जी मोबाइल लोन ऐप के जरिए कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाता था। बिना गारंटी लोन का वादा कर उन्हें फंसाया जाता और बाद में अत्यधिक शुल्क, उत्पीड़क वसूली और निजी वित्तीय जानकारी की चोरी की जाती थी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
इंटरपोल के साइबरक्राइम निदेशालय के निदेशक नील जेटन ने कहा कि संगठित साइबर अपराधी गिरोह व्यक्तियों, व्यवसायों और समुदायों को गंभीर वित्तीय और मानसिक नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसनेशनल साइबर अपराध से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।
ऑपरेशन रेड कार्ड का यह दूसरा चरण है। पहला चरण नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच चला था, जिसमें 306 गिरफ्तारियां और 1,842 उपकरण जब्त किए गए थे।
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में, ऐसे समन्वित अभियानों से यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सीमा पार साइबर ठगी नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
