आगरा: आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे गाजियाबाद के पूर्व अपर नगर आयुक्त दीपक कृष्ण सिन्हा के ठिकानों पर विजिलेंस टीम ने छापेमारी कर करीब ₹1.92 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति और जेवरात से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं। कार्रवाई आगरा और गाजियाबाद स्थित आवासों पर दो दिन तक चली, जिससे प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई।
विजिलेंस के अनुसार छानबीन के दौरान कई फ्लैट, भूखंड और महंगे घरेलू साज-सज्जा के सामान का विवरण मिला, जिनका स्रोत वैध आय से मेल नहीं खाता। अधिकारियों को ₹56 लाख से अधिक के जेवरात का भी कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला।
जांच में 11 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज हैं। आरोप है कि परिजनों के खातों से भी 20–25 लाख रुपये के कई ट्रांजैक्शन विभिन्न व्यक्तियों को किए गए, जिनकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
विजिलेंस टीम ने राजनगर एक्सटेंशन (गाजियाबाद) और आगरा के पुष्पांजलि अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक आवास पर अत्यधिक महंगी उपभोक्ता वस्तुएं, बड़े आकार के एलईडी स्क्रीन और महंगे इंटीरियर पाए गए, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे।
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जांच में पदम बिजनेस पार्क आगरा में 925 वर्गमीटर, रूबी अपार्टमेंट में 93 वर्गमीटर, विष्णुपुरी कानपुर में 1220 वर्गमीटर तथा इंदिरापुरम (गाजियाबाद) के वैभव खंड में 166 वर्गमीटर भूमि के दस्तावेज भी मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया है।
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2022 में शासन ने दीपक कृष्ण सिन्हा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी विवेचना जारी है।
दीपक कृष्ण सिन्हा वर्ष 2012 से 2017 तक आगरा में सहायक नगर आयुक्त और 2017 में गाजियाबाद में अपर नगर आयुक्त के पद पर तैनात रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों, संपत्तियों और बैंक खातों का आय के ज्ञात स्रोतों से मिलान किया जा रहा है।
विजिलेंस ने संकेत दिया है कि जांच के आधार पर संपत्तियों की जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मामले में वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला खंगाली जा रही है ताकि अवैध आय के स्रोतों का पता लगाया जा सके।
