सियोल: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने के मामले में अदालत ने विद्रोह का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सत्ता के शीर्ष से सबसे नाटकीय गिरावटों में से एक माना जा रहा है और न्यायपालिका के उस सख्त रुख को दर्शाता है, जिसमें संवैधानिक व्यवस्था से छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाता।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यून ने अवैध रूप से सेना और पुलिस बलों को जुटाकर विपक्ष के नियंत्रण वाली नेशनल असेंबली पर कब्जा करने, नेताओं को हिरासत में लेने और कार्यपालिका की शक्तियों को लंबे समय तक केंद्रीकृत करने की कोशिश की। न्यायाधीश के अनुसार यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को निलंबित करने का संगठित प्रयास था, जो दक्षिण कोरियाई कानून के तहत विद्रोह की श्रेणी में आता है।
अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि मार्शल लॉ राष्ट्रीय सुरक्षा के वास्तविक खतरे के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक गतिरोध को दरकिनार करने के लिए लगाया गया था। उनके मुताबिक योजना के तहत सशस्त्र बलों को सरकारी संस्थानों के आसपास तैनात करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों की कार्यवाही सीमित करने की तैयारी थी।
यून की ओर से कहा गया कि निर्णय एक गंभीर राष्ट्रीय आपातस्थिति की आशंका के बीच लिया गया था और उनका लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने का कोई इरादा नहीं था। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई ठोस खतरा नहीं था जो असाधारण कदमों को उचित ठहरा सके और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी जानबूझकर की गई।
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यह सजा इसलिए भी अहम है क्योंकि दक्षिण कोरिया में मृत्युदंड कानून में मौजूद होने के बावजूद 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है। ऐसे में उम्रकैद को व्यवहारिक रूप से सबसे कठोर दंड माना जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रपति पद की शक्तियों की सीमाओं और सेना पर नागरिक नियंत्रण की अनिवार्यता को स्पष्ट करता है।
इस मामले ने देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी तेज कर दिया है। यून के समर्थकों ने फैसले को राजनीतिक बताया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे संस्थागत मजबूती और कानून के शासन की पुष्टि होती है। सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा कड़ी रखी गई, क्योंकि विरोध प्रदर्शनों की आशंका थी।
इस प्रकरण ने आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य शासन के ऐतिहासिक अनुभव के कारण दक्षिण कोरिया की राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था घरेलू राजनीति में सेना के इस्तेमाल को लेकर बेहद संवेदनशील है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अल्पकालिक निलंबन भी गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है।
अब मामला अपील प्रक्रिया की ओर बढ़ेगा, क्योंकि यून के इस फैसले को चुनौती देने की संभावना है। अपील में महीनों लग सकते हैं, लेकिन तत्काल प्रभाव में यह निर्णय शीर्ष स्तर पर जवाबदेही की मिसाल बन गया है और न्यायिक निगरानी को और मजबूत करता है।
यह फैसला आधुनिक दक्षिण कोरियाई राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जो दिखाता है कि लोकतांत्रिक ढांचे को असंवैधानिक तरीकों से बदलने की कोशिशों के गंभीर कानूनी परिणाम होते हैं।
