डिबारमेंट आदेश से भविष्य की ऑर्डर पाइपलाइन पर अनिश्चितता, शेयर दबाव में

NHAI का बड़ा एक्शन: NCC और OB इंफ्रास्ट्रक्चर 2 साल तक टेंडर से बाहर

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी NCC Ltd और उसकी स्टेप-डाउन सहायक OB Infrastructure Ltd को दो साल के लिए टेंडर प्रक्रिया से डिबार कर दिया है। आदेश 17 फरवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा, जिसके बाद दोनों कंपनियां NHAI की किसी भी बोली, टेंडर या कंसोर्टियम में भाग नहीं ले सकेंगी।

इस खबर के बाद बुधवार को NCC का शेयर BSE पर 1.77% गिरकर ₹149.45 पर बंद हुआ, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

किस प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला

डिबारमेंट का मामला उत्तर प्रदेश में NH-25 के ओरई–भोगनीपुर सेक्शन और NH-2 (नया NH-27) के भोगनीपुर–बराह सेक्शन से जुड़े BOT (Annuity) मॉडल प्रोजेक्ट से संबंधित है। यह प्रोजेक्ट डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण, फाइनेंस, ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए दिया गया था।

कंपनी का कहना है कि जमीन सौंपने में देरी और अथॉरिटी की अन्य प्रक्रियागत समस्याओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई। वहीं NHAI ने अनुबंध शर्तों के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की है।

आर्बिट्रेशन और कानूनी विवाद

OB Infrastructure ने NHAI के खिलाफ आर्बिट्रेशन शुरू किया था और नवंबर 2024 में उसे अपने पक्ष में फैसला मिला। हालांकि NHAI ने इस निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी लंबित है।

इसके अलावा परियोजना के संचालन और रखरखाव से जुड़े अन्य विवाद भी जारी हैं। कंपनी का आरोप है कि कंसेशन अवधि समाप्त होने के बाद बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए डिबारमेंट आदेश जारी किया गया। कंपनी ने इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने की बात कही है।

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कारोबार पर कितना असर

NCC ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा ऑर्डर बुक और चल रही परियोजनाओं पर इस आदेश का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि भविष्य में NHAI के नए टेंडरों में भागीदारी नहीं कर पाने से ऑर्डर इनफ्लो पर असर पड़ सकता है। वास्तविक वित्तीय प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि डिबारमेंट अवधि के दौरान कौन-कौन से हाईवे प्रोजेक्ट्स बाजार में आते हैं।

इंफ्रा सेक्टर में NHAI सबसे बड़े क्लाइंट्स में से एक है, ऐसे में दो साल की रोक कंपनी की ग्रोथ विजिबिलिटी पर दबाव डाल सकती है, खासकर तब जब सड़क क्षेत्र में सरकारी खर्च जारी है।

शेयर प्रदर्शन और निवेशक नजरिया

NCC का शेयर पिछले छह महीनों में करीब 31.25% गिर चुका है, जबकि एक साल में इसमें लगभग 19.12% की गिरावट दर्ज हुई है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹9,350 करोड़ है। दिग्गज निवेशक रेखा झुनझुनवाला की हिस्सेदारी होने के कारण भी स्टॉक पर बाजार की नजर बनी हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार डिबारमेंट का तत्काल वित्तीय असर सीमित हो सकता है, लेकिन भविष्य के प्रोजेक्ट फ्लो और ऑर्डर बुक ग्रोथ पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

आगे क्या देखना होगा

अब बाजार की नजर दो प्रमुख बिंदुओं पर रहेगी—पहला, कंपनी की कानूनी चुनौती का परिणाम और दूसरा, वैकल्पिक प्रोजेक्ट्स के जरिए ऑर्डर पाइपलाइन को संतुलित करने की रणनीति। यदि कंपनी अन्य सेगमेंट या क्लाइंट्स से नए ऑर्डर हासिल करती है तो प्रभाव सीमित रह सकता है।

फिलहाल, डिबारमेंट ने इंफ्रा सेक्टर में कॉन्ट्रैक्ट अनुपालन और विवाद समाधान की अहमियत को फिर रेखांकित कर दिया है, जहां लंबित परियोजनाएं और कानूनी प्रक्रियाएं कंपनियों की ग्रोथ पर सीधा असर डाल सकती हैं।

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