सोशल मीडिया की लत और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर चल रहे एक अहम मुकदमे में Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग अदालत में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। गवाही के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि इंस्टाग्राम पर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की एंट्री रोकना “बहुत कठिन” है, क्योंकि बड़ी संख्या में यूजर अपनी उम्र गलत बताते हैं।
यह मुकदमा 20 वर्षीय युवती केली जी.एम. की याचिका पर आधारित है, जिसने आरोप लगाया है कि Meta के इंस्टाग्राम और Google के यूट्यूब ने उसकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाया। मुकदमा 9 फरवरी से चल रहा है और इसे हजारों समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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उम्र सत्यापन पर कंपनियों की जिम्मेदारी पर बहस
जुकरबर्ग ने अदालत में कहा कि Meta ने बच्चों के अकाउंट पहचानने और हटाने के लिए कुछ “प्रोएक्टिव टूल्स” विकसित किए हैं, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उनका तर्क था कि ऐप डाउनलोड से पहले उम्र सत्यापन की जिम्मेदारी फोन निर्माताओं और ऐप स्टोर संचालकों — यानी Apple और Google — की भी होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई बच्चों के पास ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक पहचान दस्तावेज नहीं होते, जिससे वास्तविक उम्र की पुष्टि करना तकनीकी रूप से मुश्किल हो जाता है।
आंतरिक दस्तावेजों में किशोर यूजर पर फोकस
वादी पक्ष के वकील ने Meta के आंतरिक ईमेल और प्रेजेंटेशन अदालत में पेश किए, जिनमें कंपनी के लिए किशोर यूजर बेस को भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया था। दस्तावेजों में “ट्वीन्स” से लेकर बड़े किशोरों तक को प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की योजनाओं का विस्तृत उल्लेख था।
कुछ ईमेल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कंपनी के भीतर चिंता भी जताई गई थी। एक वरिष्ठ नीति अधिकारी के संदेश में कहा गया था कि उम्र सीमा का प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा, जिससे यह दावा करना कठिन है कि कंपनी पूरी जिम्मेदारी निभा रही है।
नौ साल की उम्र में अकाउंट का दावा
सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने कहा कि संबंधित युवती का इंस्टाग्राम अकाउंट नौ साल की उम्र में ही बन गया था, जबकि प्लेटफॉर्म पर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अनुमति नहीं है। इस पर वकील ने सवाल उठाया कि क्या इतनी कम उम्र का बच्चा शर्तें पढ़कर समझ सकता है।
Meta का बचाव: किशोर कमाई का बड़ा स्रोत नहीं
जुकरबर्ग ने कहा कि किशोर Meta के राजस्व का बड़ा हिस्सा नहीं हैं और कंपनी की आय मुख्य रूप से विज्ञापन से आती है। उनके अनुसार, “अधिकांश किशोरों के पास खर्च करने योग्य आय नहीं होती, इसलिए व्यावसायिक दृष्टि से यह प्रमुख कारक नहीं है।”
उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में Meta ने किशोर यूजर्स के लिए सुरक्षा सेटिंग्स सख्त की हैं। 2024 में लॉन्च किए गए “टीन अकाउंट्स” में कंटेंट और इंटरैक्शन पर स्वतः प्रतिबंध लगाए गए हैं तथा 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए डिफॉल्ट कंटेंट सेटिंग को “PG-13” स्तर का किया गया है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
Meta पर पहले भी किशोरों, खासकर लड़कियों, के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर आलोचना होती रही है। 2021 में सामने आए आंतरिक दस्तावेजों में कर्मचारियों को इंस्टाग्राम के संभावित नुकसान की जानकारी होने के संकेत मिले थे।
मुकदमे का व्यापक असर संभव
यह मुकदमा मार्च के अंत तक चलने की संभावना है और इसका फैसला सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इस मामले के नतीजे का असर Meta, Google के साथ-साथ TikTok और Snap जैसी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जिनके खिलाफ समान प्रकृति के कई मुकदमे लंबित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई से यह तय हो सकता है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की जिम्मेदारी किस स्तर तक टेक कंपनियों पर डाली जा सकती है और क्या उम्र सत्यापन के लिए नए नियामक ढांचे की जरूरत है।
