बोगस फर्म ITC जाल: आगरा GST टीम ने ₹100Cr चोरी रैकेट पकड़ा—80 पासबुक+68 कार्ड बरामद।

बोगस फर्मों के जरिए ₹100 करोड़ की आईटीसी घोटाले का खुलासा, चार गिरफ्तार

Team The420
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राज्य कर विभाग के अलीगढ़ जोन ने बोगस फर्मों के माध्यम से फर्जी बिलिंग कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास करने वाले बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। प्राथमिक जांच में करीब ₹100 करोड़ की आईटीसी चोरी का मामला सामने आया है। कार्रवाई के दौरान आगरा, मथुरा और सादाबाद के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली के एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।

अपर आयुक्त ग्रेड-2 अनिल कुमार राम त्रिपाठी के अनुसार, विभागीय टीम ने मथुरा के महावन स्थित गोपी की नगरिया में एसजी ट्रेडर्स नाम की फर्म पर छापेमारी की। टीम के पहुंचने पर फर्म बंद मिली, लेकिन जांच में सामने आया कि कागजों में फर्म के संचालक संजय पटेल हैं, जबकि वास्तविक संचालन उनके ममेरे भाई मनीष पटेल कर रहे थे।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि फर्जी फर्म बनाकर कागजों में माल की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी और उसके आधार पर आईटीसी पास किया जाता था। यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों में सक्रिय था।

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किराए की दुकानों से चलता था नेटवर्क

जांच में सामने आया कि आगरा के देव शर्मा ने किराए पर दुकान लेकर फर्जी फर्म का संचालन किया था। बुलाए जाने पर वह अपने सहयोगी करन पेंगोरिया के साथ मौके पर पहुंचे, जहां से विभागीय टीम ने तलाशी में बड़ी मात्रा में दस्तावेज और बैंकिंग सामग्री बरामद की।

छापेमारी में 80 बैंक पासबुक, 68 एटीएम कार्ड, 49 चेकबुक, 7 पैन कार्ड, कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि फर्म के पंजीकरण में संपत्ति मालिक के हस्ताक्षर तक नहीं थे, जिससे दस्तावेजों की फर्जीवाड़ा स्पष्ट हुआ।

अलग-अलग भूमिकाओं में काम करता था गिरोह

आरोपियों ने बताया कि गिरोह में प्रत्येक सदस्य की अलग भूमिका थी — कोई बैंक खाते खुलवाता था, कोई फर्जी फर्म बनाता था और कोई इनवाइस जारी करता था। फर्जी बिलिंग के जरिए आईटीसी पास करने पर इन्हें प्रति ₹100 के टर्नओवर पर लगभग 30 पैसे कमीशन मिलता था।

पूछताछ में मथुरा के नागेश गौतम का नाम सामने आया, जिसने दिल्ली के अक्षत कुमार का जिक्र किया। विभाग ने अक्षत कुमार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है।

पुलिस को सौंपे गए आरोपी

कार्रवाई के बाद चारों आरोपियों को जमुनापार पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। उनके खिलाफ जीएसटी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

टैक्स चोरी पर सख्ती

अधिकारियों का कहना है कि फर्जी फर्मों के जरिए आईटीसी पास करने वाले नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है और संदिग्ध लेनदेन की डेटा एनालिटिक्स के जरिए पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इस गिरोह से जुड़े लिंक की जांच की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के रैकेट न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वैध कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित करते हैं। विभाग ने व्यापारियों से अपील की है कि वे केवल वास्तविक लेनदेन के आधार पर ही आईटीसी क्लेम करें और किसी भी संदिग्ध फर्म से दूरी बनाए रखें।

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