नई दिल्ली : एआई प्रदर्शनी में दिखाए गए रोबोट डॉग को लेकर उठे विवाद के बीच गैलगोटियास यूनिवर्सिटी अब एक नए विवाद में घिर गई है। इस बार उसके बहुचर्चित “ड्रोन सॉकर” डेमो पर सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का दावा है कि इसे भारत की पहली स्वदेशी ड्रोन सॉकर प्रणाली बताना भ्रामक है, क्योंकि प्रदर्शित डिवाइस कोरियाई उत्पाद Striker V3 ARF से मेल खाती है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो क्लिप्स में गोलाकार ड्रोन सिस्टम को विदेशी बाजार में उपलब्ध मॉडलों जैसा बताया गया है। आरोप लगाया गया है कि आयातित तकनीक को घरेलू नवाचार के रूप में पेश किया गया, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को ठेस पहुंचती है और सार्वजनिक तकनीकी प्रदर्शनों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उसी प्रदर्शनी में दिखाए गए रोबोट डॉग की उत्पत्ति को लेकर भी प्रश्न उठे थे। पर्यवेक्षकों का कहना था कि वह हार्डवेयर भी विदेशी प्लेटफॉर्म पर आधारित था।
विश्वविद्यालय ने आरोप खारिज किए
गैलगोटियास यूनिवर्सिटी ने इन आरोपों का खंडन किया है। कार्यक्रम से जारी एक वीडियो में एक फैकल्टी सदस्य कहते सुनाई देते हैं कि इंजीनियरिंग डिजाइन से लेकर एप्लिकेशन डेवलपमेंट तक का काम कैंपस में ही किया गया है और यह भारत का पहला समर्पित ड्रोन सॉकर एरीना है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि कुछ हार्डवेयर कॉम्पोनेंट बाहर से लिए गए हो सकते हैं, लेकिन सिस्टम इंटीग्रेशन, प्रोग्रामिंग और उपयोग-आधारित विकास छात्रों और इन-हाउस टीम ने किया है। अधिकारियों ने तकनीकी दस्तावेज साझा करने की बात भी कही है।
हालांकि आलोचक इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि कोर प्लेटफॉर्म विदेशी मॉडल से मेल खाता है और हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर स्टैक की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
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एआई समिट की पृष्ठभूमि में बढ़ा विवाद
यह विवाद इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जहां गैलगोटियास ने कई तकनीकी प्रदर्शन लगाए थे। रोबोट डॉग की उत्पत्ति को लेकर आपत्तियों के बाद आयोजकों द्वारा विश्वविद्यालय के पवेलियन को अस्थायी रूप से बंद करने की खबरों ने जांच और तेज कर दी थी।
टेक और स्टार्टअप जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े तकनीकी आयोजनों में नवाचार के दावों की सत्यापन प्रक्रिया पर व्यापक बहस छेड़ता है।
विशेषज्ञों ने पारदर्शिता की जरूरत बताई
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे आयोजनों में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-सा हिस्सा स्वदेशी रूप से विकसित है और कौन-सा वैश्विक प्लेटफॉर्म से लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय किट पर प्रयोग करना सामान्य है, लेकिन उसे पूरी तरह घरेलू नवाचार बताना उचित नहीं।
उनका कहना है कि भारत का तेजी से बढ़ता एआई और रोबोटिक्स इकोसिस्टम तभी विश्वसनीय बनेगा जब तकनीक की उत्पत्ति और विकास प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
आगे क्या
सूत्रों के मुताबिक भविष्य के टेक शोकेस में भागीदारी के लिए तकनीकी डिस्क्लोजर अनिवार्य किया जा सकता है। इस बीच रोबोट डॉग और ड्रोन सॉकर दोनों डेमो की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
गैलगोटियास यूनिवर्सिटी के लिए यह मामला अब महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की कसौटी बन गया है—जहां वैश्विक सहयोग और स्वदेशी नवाचार के दावों के बीच की रेखा स्पष्ट करना जरूरी हो गया है।
