चाइनीज रोबोडॉग 'Orion' विवाद: गलगोटियास को AI समिट से बाहर—स्वदेशी दावा पर सोशल मीडिया बवाल।

AI समिट में ‘रोबोडॉग’ विवाद: गलगोटियास को एक्सपो खाली करने के निर्देश, ‘देसी इनोवेशन’ दावे पर सरकार सख्त

Team The420
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दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान रोबोटिक डॉग को “स्वदेशी नवाचार” बताने के दावे पर उठे विवाद के बाद Galgotias University को AI समिट एक्सपो से तुरंत हटने को कहा गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उसके बाद तेज हुई आलोचना के मद्देनज़र यह फैसला लिया गया।

मामला तब भड़का जब समिट में मीडिया से बातचीत के दौरान एक महिला ने दावा किया कि गलगोटियास के “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” ने ‘Orion’ नाम का रोबोटिक डॉग विकसित किया है। हालांकि, टेक कम्युनिटी के कई यूजर्स ने तुरंत इशारा किया कि यह डिवाइस दरअसल Unitree Robotics का Unitree Go2 मॉडल है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर करीब ₹2–3 लाख की रेंज में उपलब्ध बताया जाता है। इसके बाद आरोप लगे कि आयातित टेक्नोलॉजी को देसी उत्पाद के तौर पर पेश किया गया।

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ऑनलाइन बैकलैश बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने X पर बयान जारी कर कहा कि उसने न तो रोबोडॉग बनाया है और न ही ऐसा कोई दावा किया है। संस्थान के मुताबिक, यह डिवाइस छात्रों को हैंड्स-ऑन लर्निंग देने के लिए खरीदा गया है, ताकि वे इसकी क्षमताओं को समझें, टेस्ट करें और आगे सुधार कर सकें। बयान में यह भी कहा गया कि “इनnovation की कोई सीमा नहीं होती” और छात्रों को वैश्विक तकनीक से परिचित कराना ही उद्देश्य है।

हालांकि, यह सफाई भी सवालों के घेरे में आ गई। X पर एक कम्युनिटी नोट में दावा किया गया कि रोबोट को ‘Orion’ नाम देकर और समिट में जिस तरह पेश किया गया, उससे यह संकेत गया कि इसे संस्थान की टीम ने विकसित किया है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई—कुछ यूजर्स ने इसे “भ्रामक प्रस्तुति” बताया, तो कुछ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को आयातित टेक्नोलॉजी दिखाने में पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि एक्सपो से हटाने का निर्देश इसलिए दिया गया ताकि समिट के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी भी तरह के गलत दावे या अस्पष्ट ब्रांडिंग के लिए न हो। अधिकारियों के मुताबिक, भारत जैसे उभरते AI इकोसिस्टम में विश्वसनीयता सबसे अहम है, और किसी भी प्रदर्शक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह तकनीक की उत्पत्ति और भूमिका को स्पष्ट रूप से बताए।

यूनिवर्सिटी ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि उसका मकसद “ओनरशिप क्लेम” नहीं बल्कि छात्रों को अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से रूबरू कराना है—चाहे वह अमेरिका, चीन या सिंगापुर जैसे ग्लोबल इनोवेशन हब से क्यों न आए। संस्थान के अनुसार, लक्ष्य छात्रों को प्रेरित करना है ताकि वे भारत से विश्वस्तरीय समाधान विकसित कर सकें।

घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या AI और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में शोकेसिंग के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस की जरूरत है? जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में “डेमो बनाम डेवलपमेंट” की लाइन साफ होनी चाहिए, ताकि दर्शक और निवेशक दोनों भ्रमित न हों।

फिलहाल, एक्सपो से हटाए जाने के बाद मामला शांत होता दिख रहा है, लेकिन टेक समुदाय में यह बहस जारी है कि भारत के AI मंचों पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी कैसे सुनिश्चित की जाए—ताकि ‘मेक इन इंडिया’ की भावना वास्तविक नवाचार के साथ आगे बढ़े, न कि गलतफहमी के सहारे।

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