रेलवे का बड़ा घोटाला: बरेली स्टोर से 1200+ महंगी कोच बैटरियां गायब—RPF सुरक्षा फेल।

बरेली जंक्शन स्टोर से 142 कोचों की 1200+ बैटरियां चोरी, कई दिन दबा रहा मामला

Team The420
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बरेली जंक्शन के वॉशिंग लाइन परिसर स्थित स्टोर से अलग-अलग ट्रेनों के 142 कोचों की 1200 से अधिक बैटरियां चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैटरियों के गायब होने की जानकारी स्टॉक जांच के दौरान हुई, जिसके बाद उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल मुख्यालय तक हड़कंप मच गया। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने कई दिनों तक मामले को दबाए रखा और उच्च स्तर पर जानकारी पहुंचने के बाद ही रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

रेलवे कोचों में बिजली आपूर्ति और करंट प्रबंधन के लिए बैटरियां लगाई जाती हैं, जिनकी कीमत काफी अधिक होती है। वॉशिंग लाइन पर आने वाली गाड़ियों के कोचों की तकनीकी जांच और बैटरी बदलने का काम यहीं किया जाता है। पुरानी बैटरियां स्टोर में सुरक्षित रखी जाती हैं, लेकिन लंबे समय से स्टोर और वॉशिंग लाइन से बैटरियों और अन्य स्क्रैप की चोरी होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी।

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हाल ही में स्टॉक मिलान के दौरान बड़ी संख्या में बैटरियां गायब पाई गईं। इसके बाद मंडल मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्टोर इंचार्ज सहित संबंधित कर्मचारियों को तलब किया। विभागीय जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है और बैटरियों की वास्तविक संख्या का मिलान किया जा रहा है।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि रेलवे संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी के पास होती है। इतने बड़े स्तर पर चोरी होने के बावजूद आरपीएफ को जानकारी न होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न माना जा रहा है। मामले में आरपीएफ की कार्यप्रणाली की अलग से जांच के आदेश दिए गए हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने से पहले चोरी या गायब बैटरियों की सटीक संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन प्रारंभिक आंकड़ों में 1200 से अधिक बैटरियां कम पाई गई हैं। इलेक्ट्रिक विभाग को भी जिम्मेदारी तय करने और आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि कोच बैटरियों की कमी से ट्रेनों की मेंटेनेंस प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, क्योंकि इन्हीं के जरिए लाइटिंग, फैन और अन्य ऑन-बोर्ड सिस्टम संचालित होते हैं। बड़े पैमाने पर बैटरियां गायब होना केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं बल्कि परिचालन सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी है।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक चोरी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था, जिससे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। जांच कमेटी स्टोर के रिकॉर्ड, एंट्री रजिस्टर, स्क्रैप डिस्पोजल प्रक्रिया और सुरक्षा तैनाती की समीक्षा कर रही है।

मामले ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था, स्टॉक प्रबंधन और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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