टी-20 क्रिकेट विश्वकप शुरू होते ही ऑनलाइन सट्टेबाजी का जाल एक बार फिर सक्रिय हो गया है। फर्जी फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के नाम पर ‘ड्रीम-11’ से मिलते-जुलते डिजाइन और लोगो वाली वेबसाइटों के जरिए लोगों को दांव लगाने के लिए उकसाया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर टीम की जीत-हार, बल्लेबाज के रन, विकेटों की संख्या और यहां तक कि हर गेंद पर पैसा लगाया जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि अधिकांश संदिग्ध लिंक विदेशी सर्वरों से संचालित हो रहे हैं और सोशल मीडिया, टेलीग्राम व व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। उपयोगकर्ताओं को शुरुआत में छोटे दांव पर जीत दिखाकर भरोसा बनाया जाता है, जिसके बाद उन्हें बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। बड़ी रकम जमा होते ही निकासी बंद कर दी जाती है या अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है।
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सूत्रों के अनुसार कई फर्जी प्लेटफॉर्म खुद को वैध फैंटेसी गेमिंग ऐप बताकर “कई गुना मुनाफा” का लालच देते हैं। इनमें ‘ड्रीम एक्स अंबानी’, ‘ड्रीम 11 अडानी’, ‘ड्रीम क्रिकेट’ और ‘ड्रीम बेटिंग वेबसाइट’ जैसे नामों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन नामों और लोगो को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम उपयोगकर्ता असली और नकली में अंतर न कर सके।
पिछले वर्षों में भी बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान इसी तरह के रैकेट सामने आए थे। आईपीएल के दौरान लंका क्षेत्र में कार्रवाई कर सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 2024 में चेतगंज क्षेत्र में भी सात आरोपियों को पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि अब सट्टेबाजी का नेटवर्क पारंपरिक ठिकानों से हटकर पूरी तरह मोबाइल और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो गया है, जिससे इसे ट्रैक करना अधिक कठिन हो गया है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ये फर्जी साइटें केवल सट्टेबाजी तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उपयोगकर्ताओं की बैंकिंग डिटेल्स और केवाईसी दस्तावेज भी हासिल कर लेती हैं। बाद में इन जानकारियों का इस्तेमाल अन्य साइबर अपराधों में किया जाता है। कई मामलों में म्यूल बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट का उपयोग कर रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिससे ट्रांजैक्शन ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स का संचालन संगठित तरीके से किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर प्रचार किया जाता है, टेलीग्राम चैनलों पर मैच से पहले “इनसाइड टिप” और “फिक्स्ड ऑड्स” के नाम पर लोगों को जोड़ा जाता है और फिर पेमेंट लिंक भेजे जाते हैं। कई लिंक बार-बार बदल दिए जाते हैं ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।
लोगों से अपील की गई है कि किसी भी ऐसे ऐप या वेबसाइट पर पैसा न लगाएं जिसका आधिकारिक स्रोत स्पष्ट न हो। अत्यधिक मुनाफे का दावा, अनधिकृत पेमेंट गेटवे, केवल लिंक के जरिए रजिस्ट्रेशन और केवाईसी के नाम पर संवेदनशील जानकारी मांगना साइबर ठगी के संकेत हो सकते हैं। वैध फैंटेसी गेमिंग और अवैध सट्टेबाजी के बीच अंतर समझना जरूरी है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी या फर्जी गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ी जानकारी मिलने पर हेल्पलाइन नंबर 9670705555 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें, क्योंकि मोबाइल आधारित बेटिंग तेजी से बढ़ रही है।
विश्वकप के दौरान संदिग्ध लिंक की निगरानी बढ़ा दी गई है और ऐसे प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने की कार्रवाई जारी है। साथ ही वित्तीय लेनदेन से जुड़े खातों की जांच कर नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। साइबर इकाइयों का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और वैध दिखने वाले हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
