नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच भारतीय आईटी शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे छोटे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। हाल के कारोबारी सत्रों में आईटी कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू से करीब 56 अरब डॉलर (लगभग ₹4.6 लाख करोड़) साफ हो गए। निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है।
इस गिरावट का सबसे अधिक असर खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा, जिन्होंने घबराकर बिकवाली की। हालांकि दिलचस्प रूप से बड़े संस्थागत निवेशकों और फंड हाउस ने इस कमजोरी को खरीदारी का अवसर माना और निचले स्तरों पर आईटी शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई। बाजार खुलने के बाद निचले स्तर से आईटी स्टॉक्स में खरीदारी लौटती भी दिखाई दी।
आईटी सेक्टर पर दबाव की मुख्य वजह एआई को लेकर यह धारणा है कि ऑटोमेशन और जनरेटिव एआई टूल्स पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग को कम कर सकते हैं। निवेशकों को आशंका है कि कम लागत में काम होने से आउटसोर्सिंग मॉडल प्रभावित हो सकता है। इसी डर के चलते टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
हालांकि बड़े निवेशकों का नजरिया अलग है। उनका मानना है कि एआई आईटी कंपनियों के लिए खतरा नहीं बल्कि नया अवसर है। एआई के इंटीग्रेशन, डेटा मैनेजमेंट, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए आईटी कंपनियों की मांग बढ़ेगी। यही वजह है कि कई फंड हाउस इस गिरावट को लंबी अवधि के निवेश का आकर्षक स्तर मान रहे हैं।
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उद्योग के संकेत बताते हैं कि भारतीय आईटी कंपनियां तेजी से एआई आधारित समाधान विकसित कर रही हैं। कई कंपनियों ने एआई प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन टूल और डोमेन-विशिष्ट सॉल्यूशन लॉन्च किए हैं। अर्निंग कॉल्स में भी एआई पर लगातार फोकस दिखाई दे रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि सेक्टर भविष्य के लिए खुद को पुनर्गठित कर रहा है।
इतिहास भी बताता है कि आईटी सेक्टर ने पहले कई बड़े बदलावों का सामना किया है। वाई2के, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में भी शुरुआती आशंकाएं थीं, लेकिन हर बार कंपनियों ने नए बिजनेस मॉडल अपनाकर ग्रोथ जारी रखी। मजबूत वैश्विक क्लाइंट बेस, स्किल्ड वर्कफोर्स और मजबूत बैलेंस शीट इस सेक्टर की प्रमुख ताकत मानी जाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट से वैल्यूएशन आकर्षक हुए हैं, लेकिन निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। कंपनी के फंडामेंटल, ऑर्डर बुक, एआई रणनीति और मार्जिन आउटलुक का विश्लेषण जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश रणनीति अधिक उपयुक्त मानी जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अल्पकाल में एआई को लेकर अनिश्चितता के कारण आईटी शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में एआई अपनाने वाली कंपनियों के लिए नए राजस्व स्रोत खुल सकते हैं।
कुल मिलाकर, जहां छोटे निवेशक एआई के डर से नुकसान झेल रहे हैं, वहीं बड़े निवेशक इसे सेक्टर के अगले विकास चक्र की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह तय करेगा कि एआई भारतीय आईटी के लिए चुनौती साबित होता है या “ब्रह्मास्त्र” बनकर नई ग्रोथ की राह खोलता है।
