फर्जी दस्तावेजों के सहारे बोगस फर्म बनाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। संयुक्त कार्रवाई में एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार है। शुरुआती जांच में 16 फर्जी फर्मों के जरिए करीब ₹2.75 करोड़ की कर चोरी का खुलासा हुआ है।
पुलिस के मुताबिक गिरोह की गतिविधियां कई जिलों तक फैली हुई थीं और फर्जी इनवॉइस के जरिए टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया जा रहा था। आरोप है कि कुछ पेशेवरों की मदद से फर्मों का पंजीकरण कराया गया और सत्यापन प्रक्रिया में गलत रिपोर्ट लगाकर विभागीय सिस्टम को चकमा दिया गया। मामले में विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और उनकी जांच की जा रही है।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तबस्सुम, प्रशांत बेंजवाल, दौलत राम और सुमित सौरभ के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तबस्सुम गिरोह के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रही थी और फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्था से लेकर बोगस फर्म तैयार कराने तक का काम देखती थी।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने अलग-अलग नामों से फर्में बनाकर फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाई और इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। एक मामले में ही ₹52 लाख की जीएसटी चोरी का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच आगे बढ़ने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार सुमित सौरभ की फर्म के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर टैक्स चोरी की गई थी, जबकि दौलत राम के नाम से पंजीकृत एक अन्य फर्म का भी इस्तेमाल किया गया। गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क कर फर्जी लेनदेन दिखाते थे, ताकि कागजों में कारोबार वास्तविक लगे।
मुख्य सरगना अम्मार अंसारी की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क और फर्जी फर्मों की संख्या बढ़ने की आशंका है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि फर्जी पंजीकरण के दौरान किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों ने लापरवाही बरती या जानबूझकर गलत सत्यापन रिपोर्ट दी। दोषी पाए जाने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी इनवॉइस आधारित जीएसटी धोखाधड़ी में शेल कंपनियां, डमी निदेशक और नकली पते का उपयोग आम तौर पर किया जाता है। ऐसे मामलों में बैंकिंग ट्रेल, जीएसटी रिटर्न और ई-वे बिल डेटा का मिलान कर नेटवर्क का खुलासा किया जाता है।
पुलिस ने कहा कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं। अधिकारियों ने व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध इनवॉइस या फर्जी बिलिंग की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि राजस्व की चोरी रोकी जा सके।
