10 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स, सैम ऑल्टमैन बोले—दुनिया का 2nd बड़ा AI बाजार।

चैटजीपीटी के लिए भारत बना दूसरा सबसे बड़ा बाजार, एआई उपयोग में तेज उछाल

Team The420
4 Min Read

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत चैटजीपीटी के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। उपयोगकर्ताओं की तेज वृद्धि और एआई टूल्स की व्यापक मांग ने देश को वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अहम स्थान दिलाया है, हालांकि शोध, मॉडल विकास और पेटेंट के मामले में भारत अभी भी अमेरिका और चीन से पीछे है।

अनुमानों के अनुसार, एआई आधारित सेवाओं का इस्तेमाल शिक्षा, आईटी, स्टार्टअप, ग्राहक सेवा और कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है। अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि भारत उपयोगकर्ताओं की संख्या के लिहाज से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और बड़ी युवा आबादी ने इस वृद्धि को गति दी है।

एआई की बढ़ती मांग का असर भौतिक ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। देश में डेटा सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में भारत सातवें स्थान पर है, जहां 276 डेटा सेंटर संचालित हो रहे हैं। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है और निकट भविष्य में भारत के कनाडा (286) और फ्रांस (338) को पीछे छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।

Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology

हालांकि उपयोग के स्तर पर तेजी के बावजूद एआई शोध में भारत की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। नए एआई मॉडल विकसित करने में अमेरिका का दबदबा कायम है, जबकि चीन एआई शोध प्रकाशनों और पेटेंट के मामले में आगे है। भारत ने 2010 की तुलना में 2023 तक अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मुकाबले यह वृद्धि सीमित मानी जा रही है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार एआई पेटेंट में अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जबकि चीन दूसरे स्थान पर है। भारत की हिस्सेदारी अभी भी कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि देश में एआई उपयोग तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मूल शोध और नवाचार को और गति देने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के विस्तार से आईटी उद्योग में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में नए एआई मॉडल लॉन्च होने के बाद आईटी इंडेक्स शेयरों में गिरावट देखी गई, जिसे ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर संभावित असर से जोड़कर देखा गया। हालांकि दीर्घकाल में एआई से नए रोजगार और कौशल आधारित अवसर पैदा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

सरकार और उद्योग दोनों स्तरों पर एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई स्टार्टअप्स पर निवेश बढ़ाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शोध, पेटेंट और उच्च स्तरीय मॉडल विकास पर फोकस बढ़ाया गया तो भारत एआई उपयोगकर्ता बाजार से आगे बढ़कर एआई नवाचार केंद्र भी बन सकता है।

एआई के बढ़ते प्रभाव ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि भविष्य में वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा का प्रमुख खिलाड़ी बनने की क्षमता रखता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article