दवा की शीशी में ज़हर: ट्रामाडोल की आड़ में नकली दवाओं का देशव्यापी रैकेट बेनकाब, 9 गिरफ्तार

Team The420
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दर्द निवारक दवा ट्रामाडोल के नाम पर नकली गोलियां बनाकर उन्हें नशे के विकल्प के रूप में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। बिहार के गया में चल रही अवैध फैक्टरी पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकली दवाएं, कच्चा माल और उत्पादन मशीनरी जब्त की गई है। इस मामले में सरगना अरुण समेत कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

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जांच में सामने आया कि गिरोह तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर को प्रोसेस कर गोलियों में बदलता था और उन्हें अवैध मेडिकल स्टोर तथा फर्जी चिकित्सा केंद्रों के जरिए ऊंचे दामों पर बेचता था। नशे के आदी लोगों के बीच इन गोलियों को हेरोइन के सस्ते विकल्प के तौर पर खपाया जा रहा था। इससे एक तरफ ड्रग तस्करी को बढ़ावा मिल रहा था तो दूसरी तरफ आम मरीजों की जान को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

पिछले सप्ताह गिरफ्तार आरोपी तनिष्क झा से पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। उसकी निशानदेही पर क्राइम ब्रांच की टीम ने गया में छापा मारकर उस फैक्टरी का पता लगाया जहां बिना किसी योग्य मैन्युफैक्चरिंग या एनालिटिकल केमिस्ट की मौजूदगी के बड़े पैमाने पर दवाओं का उत्पादन किया जा रहा था। मौके से नकली गोलियां, इंजेक्शन शीशियां, पैकिंग सामग्री और टैबलेट बनाने वाली मशीनें बरामद हुईं।

जांच एजेंसियों के अनुसार फैक्टरी एक निजी कंपनी के नाम पर पंजीकृत थी और उसे केवल परीक्षण के उद्देश्य से सीमित प्रकार की टैबलेट बनाने की अनुमति मिली थी। आरोप है कि इसी लाइसेंस की आड़ में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का उत्पादन कर उन्हें दिल्ली समेत कई शहरों में सप्लाई किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दो फर्जी दवा निर्माण इकाइयों का भंडाफोड़ किया गया।

छापेमारी के दौरान करीब 1,19,800 नकली जिंक टैबलेट, 42,480 एज़िथ्रोमाइसिन गोलियां, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल पाउडर और 444 नकली इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद किए गए। इसके अलावा ट्रामाडोल का वह कच्चा माल भी मिला जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत पांच करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह केवल ट्रामाडोल ही नहीं बल्कि एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और अन्य सामान्य दवाओं की नकली खेप तैयार कर रहा था।

इन दवाओं को असली ब्रांड जैसी पैकिंग में बाजार में उतारा जाता था, जिससे दवा विक्रेताओं और मरीजों के लिए पहचान करना मुश्किल हो जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी नकली दवाएं शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकती हैं। गलत मात्रा या अशुद्ध रसायनों से बनी गोलियां सांस की गति धीमी कर सकती हैं, मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती हैं, लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं और गंभीर मामलों में हार्ट अटैक या मिर्गी के दौरे तक का कारण बन सकती हैं।

ट्रामाडोल का अनियंत्रित उपयोग तेजी से लत पैदा करता है और ओवरडोज की स्थिति में मौत का खतरा बढ़ जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने आपूर्ति के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले, उत्पादन करने वाले, पैकेजिंग करने वाले और वितरण करने वाले अलग-अलग सदस्य शामिल थे। कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क की पहचान के लिए पुलिस अवैध मेडिकल स्टोर्स और सप्लायर्स की सूची तैयार कर रही है।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। लाइसेंस व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर कम समय में भारी मुनाफा कमाने की कोशिश की जा रही थी। ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ मिलकर सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी जारी है।

इस कार्रवाई को नकली दवाओं के खिलाफ हाल के समय की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। पुलिस ने संकेत दिया है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों में भी जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।

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