ईडी ने सरकारी बीएड कॉलेज के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ पीएमएलए अभियोजन दायर किया, ₹1.22 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

Team The420
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भोपाल | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल आंचलिक कार्यालय, ने सरकारी बीएड कॉलेज, एतरपुर के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य संतोष कुमार शर्मा और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। यह शिकायत 28 जनवरी 2025 को माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय, भोपाल के समक्ष प्रस्तुत की गई, जहां अदालत ने मामले में पूर्व-संज्ञान सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए हैं।

ईडी ने यह जांच विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। उक्त एफआईआर में संतोष कुमार शर्मा और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) सहपठित धारा 13(2) के तहत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए थे।

जांच के दौरान ईडी को पता चला कि लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए संतोष कुमार शर्मा ने अपने पद का आपराधिक दुरुपयोग किया और अपनी ज्ञात वैध आय से कहीं अधिक संपत्तियां अर्जित कीं। एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में ₹1,23,32,057 की अनुपातहीन संपत्ति एकत्र की।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्य अपराध से अर्जित धन के प्रत्यक्ष लाभार्थी थे। जांच एजेंसी का कहना है कि संतोष कुमार शर्मा ने अनुसूचित अपराध से प्राप्त धन को छिपाने, उसका स्तर बदलने और उसे वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के कृत्य किए।

इस मामले में ईडी, भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 अगस्त 2025 को अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 09/2025 जारी किया था। आदेश के तहत ₹1,19,09,000 मूल्य की अचल संपत्तियां और ₹3,52,671 की चल संपत्तियां कुर्क की गईं। इस प्रकार, कुल ₹1,22,61,571 की संपत्तियों को अपराध से अर्जित धन मानते हुए कुर्क किया गया।

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जांच में पाया गया कि जांच अवधि के दौरान आरोपी की कुल वैध आय ₹1,30,27,494 थी, जबकि उसका कुल व्यय और निवेश ₹2,53,59,551 आंका गया। इस प्रकार, ₹1,23,32,057 की संपत्ति वैध आय की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत अधिक पाई गई, जिसे ईडी ने अनुपातहीन संपत्ति करार दिया।

ईडी के अनुसार, आरोपी ने न केवल अपने नाम पर बल्कि अपनी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियां अर्जित कीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि ऐसा वास्तविक स्वामित्व छिपाने और अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को वैध दिखाने के उद्देश्य से किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इन संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए अघोषित नकदी, अस्पष्ट बैंक जमाएं और कई स्तरों पर किए गए वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया गया। इसके अतिरिक्त, आरोपी द्वारा किए गए कई व्यक्तिगत और घरेलू खर्चों का कोई ठोस स्रोत या वैध पुष्टि नहीं पाई गई।

ईडी का कहना है कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों से सार्वजनिक पद के व्यवस्थित दुरुपयोग, अनुपातहीन संपत्ति के कब्जे और अवैध धन को वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। एजेंसी के अनुसार, ये कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत अपराध होने के साथ-साथ पीएमएलए, 2002 के तहत भी अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं।

ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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