हैदराबाद | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद आंचलिक कार्यालय ने मेसर्स मेटालॉइस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (एमटीपीएल), उसके प्रबंध निदेशक जयंत बिस्वास और उनकी पत्नी मौसमी बिस्वास के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। यह शिकायत रंगारेड्डी (हैदराबाद) स्थित माननीय विशेष पीएमएलए न्यायालय के समक्ष दाखिल की गई, जिस पर अदालत ने 28 जनवरी 2026 को संज्ञान लिया।
ईडी ने यह जांच तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी, जिनमें मेटालॉइस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, जयंत बिस्वास और अन्य के खिलाफ उच्च ब्याज दरों का लालच देकर निवेशकों से धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। ये प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420 के तहत दर्ज की गई थीं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न राज्यों के निवेशकों की शिकायतों के आधार पर भी कई अन्य एफआईआर दर्ज की गईं।
ईडी की जांच में सामने आया कि एमटीपीएल के पास कथित निवेश योजनाएं संचालित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की कोई वैधानिक अनुमति नहीं थी। कंपनी की स्थापना मूल रूप से धातुकर्म उत्पादों और धातु वेल्डिंग से संबंधित व्यवसाय के लिए की गई थी, लेकिन बाद में इसे एक दिखावटी इकाई के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसके माध्यम से अत्यधिक और अवास्तविक लाभ का वादा कर जनता से धन जुटाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इन योजनाओं के पीछे कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि मौजूद नहीं थी।
ईडी ने बताया कि कंपनी के प्रमोटर जयंत बिस्वास और मौसमी बिस्वास ने आकर्षक निवेश योजनाओं के जरिए धन संग्रह की एक सुनियोजित धोखाधड़ी योजना तैयार की। निवेशकों को बेहद कम समय में 40 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक के अवास्तविक रिटर्न का आश्वासन दिया गया। जांच के अनुसार, ये योजनाएं एक पारंपरिक पोंजी मॉडल पर आधारित थीं, जिसमें शुरुआती निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से प्राप्त धन के जरिए किया जाता था।
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जांच में यह भी पाया गया कि एमटीपीएल ने निवेशकों से लगभग ₹200 करोड़ का गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क भी वसूला। कंपनी ने विभिन्न समझौतों और दस्तावेजों के माध्यम से अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया और अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में दर्शाई गई किसी भी वास्तविक उत्पादक गतिविधि के बिना धन एकत्र किया। इसके परिणामस्वरूप, 4,000 से अधिक निवेशकों से लगभग ₹114.52 करोड़ की राशि जुटाई गई।
ईडी के अनुसार, इस राशि में से केवल ₹99.57 करोड़ निवेशकों को लौटाए गए, जबकि शेष ₹14.95 करोड़ की राशि आरोपियों ने अपने पास रख ली। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे ढांचे के जरिए निवेशकों को कंपनी की वैधता और विश्वसनीयता का झूठा आभास दिया गया।
वैधता का भ्रम पैदा करने के लिए एमटीपीएल ने मुद्रित ब्रोशर, वीडियो प्रस्तुतियों और आलीशान होटलों में आयोजित भव्य सेमिनारों व प्रस्तुतियों सहित आक्रामक विपणन रणनीतियों का सहारा लिया। कंपनी ने कमीशन एजेंटों, टीम लीडरों और शुरुआती निवेशकों को आगे और निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी। हालांकि, जैसे-जैसे नए निवेश का प्रवाह कम हुआ, ये भुगतान रुक गए, जिससे निवेशकों में असंतोष और घबराहट फैल गई।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अपराध से अर्जित धन का उपयोग प्रचार गतिविधियों, यात्राओं और अन्य व्यावसायिक उपक्रमों में किया। इनमें एसओ वेकेशंस, समरीन कॉफी हाउस, मेसर्स अर्थक्रांति बीडी निधि लिमिटेड में निवेश, कोलकाता में दो फ्लैटों का अधिग्रहण और मौसमी बिस्वास की मां के नाम पर सावधि जमा शामिल हैं।
इससे पहले, ईडी ने मामले में अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 23/हैदराबाद/2025 दिनांक 30 अप्रैल 2025 के तहत लगभग ₹132 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया था, जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया बताया गया है।
ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी वित्तीय लेन-देन तथा तथ्यों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
