जम्मू | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जम्मू सब-जोनल कार्यालय ने भारत पेपर्स लिमिटेड (बीपीएल), उसके निदेशकों और अन्य संबद्ध व्यक्तियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), जम्मू में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह मामला भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से जुड़े लगभग ₹200 करोड़ के बैंक ऋण धोखाधड़ी से संबंधित है।
ईडी ने यह अभियोजन शिकायत 30 जनवरी 2026 को दायर की है, जिसमें अनिल कुमार, परवीन कुमार, बलजिंदर कुमार, राजिंदर कुमार और अनिल कश्यप को धन शोधन के अपराध के लिए आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक ऋण धोखाधड़ी से प्राप्त धन को अवैध रूप से उपयोग, डायवर्ट और सिफन किया, जिससे कंसोर्टियम बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
ईडी की जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी), जम्मू द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई थी। सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि भारत पेपर्स लिमिटेड को विशिष्ट व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए स्वीकृत बैंक ऋणों का उपयोग निर्धारित प्रयोजनों के लिए नहीं किया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2008 से 2013 के बीच आरोपियों ने ऋण राशि को संगठित और बहु-स्तरीय तरीके से डायवर्ट किया, ताकि धन के स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके। वैध कारोबारी गतिविधियों में निवेश करने के बजाय ऋण की रकम को विभिन्न माध्यमों से बाहर निकाला गया।
ईडी के अनुसार, इस प्रक्रिया में फर्जी और बोगस इकाइयों के जरिए धन को घुमाया गया, बड़े पैमाने पर नकद निकासी की गई और कंसोर्टियम बैंकों के बाहर अलग-अलग बैंक खाते खोलकर उनमें प्राप्तियों को डायवर्ट किया गया। ऋण, चालू और कैश क्रेडिट खातों से भारी नकद निकासी कर धन के ट्रेल को धुंधला करने का प्रयास किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि धन को आगे पेपर एंटिटीज़ और शेल कंपनियों के माध्यम से लेयर किया गया, जिनका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था। इसके अतिरिक्त, फैक्ट्री परिसर से मशीनरी के पुर्जों को गुप्त रूप से हटाकर बेचा गया और इन लेन-देन को फर्जी इनवॉइस के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।
ईडी ने बताया कि वित्त वर्ष 2010-11 से 2012-13 के दौरान बैलेंस शीट में असामान्य स्टॉक राइट-ऑफ दिखाकर खातों में हेरफेर किया गया, ताकि धन की हेराफेरी को छिपाया जा सके।
जांच के दौरान कई बोगस फर्मों और इकाइयों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर धन की सिफनिंग और लेयरिंग के लिए किया गया। इनमें एम/एस डीईई ईएसएस इंजीनियर्स, एम/एस त्रिवेणी इंजीनियर्स, एम/एस एरो स्कैफटेक प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस आर एस इंडस्ट्रीज, एम/एस एरो एंटरप्राइजेज, एम/एस सुका मोल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस काहियन ऑटो इंडस्ट्रीज और एम/एस रीजेंट फैब्रिकेशंस सहित अन्य इकाइयां शामिल हैं।
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ईडी ने यह भी पाया कि धन की लेयरिंग के तहत राशि को पहले एम/एस इंडो ग्लोबल टेक्नो ट्रेड लिमिटेड, एक गैर-कार्यशील कंपनी, में भेजा गया और बाद में इसे शेयर कैपिटल और निवेश के रूप में भारत पेपर्स लिमिटेड में वापस लाया गया, ताकि ऑडिट ट्रेल को छिपाया जा सके और अवैध धन को वैध स्वरूप दिया जा सके।
इससे पहले, ईडी ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए थे। इन कार्रवाइयों के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। साथ ही ₹30 लाख से अधिक नकद और लगभग 600 ग्राम सोना भी जब्त किया गया, जिसे अपराध से अर्जित धन से जुड़ा बताया गया है।
जांच के दौरान भारत पेपर्स लिमिटेड के एक निदेशक अनिल कुमार को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार भी किया गया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि अपराध से अर्जित धन का उपयोग अचल संपत्तियों के अधिग्रहण और निर्माण में किया गया। इसके चलते एजेंसी ने ₹66.77 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इनमें जिला कठुआ स्थित औद्योगिक भूमि और उस पर निर्मित ढांचा, जो भारत पेपर्स लिमिटेड के नाम पर है, तथा लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित दो आवासीय संपत्तियां शामिल हैं, जो अंजू अग्रवाल, राजिंदर कुमार अग्रवाल और परवीन कुमार अग्रवाल के नाम पर हैं।
ईडी ने यह भी बताया कि भारत पेपर्स लिमिटेड दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एनसीएलटी, चंडीगढ़ बेंच में कार्यवाही का सामना कर रही है। एजेंसी के अनुसार, कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के दौरान कंपनी और उसके आरोपी निदेशकों द्वारा आवश्यक रिकॉर्ड सौंपने सहित सहयोग नहीं किया गया।
ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी खुलासे होने की संभावना है।
