क्लर्क की नौकरी, करोड़ों का साम्राज्य: पूर्व एसएफसी क्लर्क के ठिकानों पर छापों में ₹17 करोड़ की संपत्ति बरामद

Team The420
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गोरखपुर / मऊ — आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक बड़े मामले में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के पूर्व क्लर्क गगन कुमार सिंह से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी कर लगभग ₹17 करोड़ की संपत्ति का पता लगाया है। यह कार्रवाई बिहार और झारखंड में स्थित आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर एक साथ की गई, जहां अचल संपत्तियों, निर्माणाधीन भवनों और निवेश से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

सतर्कता अधिष्ठान की गोरखपुर सेक्टर टीम ने यह कार्रवाई शासन से अभियोजन की स्वीकृति और औपचारिक विवेचना आदेश जारी होने के बाद शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह संदेह सामने आया था कि गगन कुमार सिंह ने अपने ज्ञात आय स्रोतों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसी आधार पर गोरखपुर में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच रिकॉर्ड के अनुसार, गगन कुमार सिंह वर्ष 1992 से 2025 तक लगातार मऊ में राज्य खाद्य निगम में लिपिक पद पर तैनात रहे। इस दौरान वे विभागीय प्रशासन और भंडारण से जुड़े कार्यों से संबद्ध थे। सतर्कता जांच में यह पाया गया कि उनकी सेवा अवधि के दौरान घोषित आय, वेतन और वैधानिक भत्तों की तुलना में उनके और उनके परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियों का मूल्य और विस्तार असामान्य रूप से अधिक है।

सूत्रों के मुताबिक, गगन सिंह के खिलाफ पहले भी आय से अधिक संपत्ति को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों पर प्रारंभिक आंतरिक जांच के बाद आय और संपत्ति के बीच गंभीर असंगतियों के संकेत मिले, जिसके चलते विस्तृत सतर्कता जांच की सिफारिश की गई। इसके बाद 14 मई 2025 को उन्हें मऊ से स्थानांतरित कर ललितपुर से संबद्ध कर दिया गया, जिसके साथ ही जांच प्रक्रिया को गति दी गई।

छापेमारी के दौरान सतर्कता टीम ने गगन सिंह के पैतृक गांव गुलनी कुशहा, थाना शम्भूगंज, जनपद बांका (बिहार) स्थित आवासीय भवन के अलावा भागलपुर (बिहार) और देवघर (झारखंड) में मौजूद उनके मकानों, फ्लैटों और गोदामों की तलाशी ली। इन परिसरों से बड़ी संख्या में संपत्ति संबंधी दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और निर्माण से जुड़े कागजात जब्त किए गए।

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अधिकारियों के अनुसार, तलाशी में जिन संपत्तियों की पहचान हुई है, उनमें कई अचल परिसंपत्तियां, महंगे निर्माण कार्य, व्यावसायिक गोदाम और अन्य निवेश शामिल हैं। इनका कुल अनुमानित मूल्य लगभग ₹17 करोड़ आंका गया है। यह आंकड़ा प्रारंभिक मूल्यांकन पर आधारित है और विस्तृत वित्तीय तथा तकनीकी जांच के बाद इसमें संशोधन संभव है।

जब्त किए गए दस्तावेजों की अब गहन पड़ताल की जा रही है ताकि संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, धन के स्रोत और संभावित बेनामी लेन-देन की पहचान की जा सके। इसके साथ ही, सेवा काल के दौरान गगन सिंह द्वारा दाखिल आय विवरणियों की तुलना बरामद संपत्तियों से की जा रही है।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या गगन सिंह इन संपत्तियों के लिए वैध और संतोषजनक आय स्रोतों का स्पष्टीकरण दे पाते हैं या नहीं। भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति का उचित स्पष्टीकरण देने में विफल रहता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है।

सतर्कता अधिष्ठान ने संकेत दिया है कि जांच के अगले चरण में संपत्तियों की कुर्की, आरोपपत्र दाखिल करने और अन्य कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही, संपत्तियों से जुड़े परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।

यह मामला उन बढ़ते मामलों की श्रृंखला में शामिल हो गया है, जिनमें लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहे सरकारी कर्मचारियों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप सामने आ रहे हैं। सतर्कता अधिष्ठान ने स्पष्ट किया है कि पद या रैंक से परे, ऐसे सभी मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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