कांगो में खदान धंसने से 227 की मौत, बारिश के बाद कोल्टन माइंस में तबाही

Team The420
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रुबाया, पूर्वी कांगो | पूर्वी कांगो के नॉर्थ किवु प्रांत में स्थित रुबाया कोल्टन खदान में भारी बारिश के बाद हुए भीषण भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है। इस हादसे में अब तक कम से कम 227 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कई लोग अब भी खदान की सुरंगों और मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है।

दुर्घटना उस समय हुई जब बड़ी संख्या में लोग खदान के भीतर हाथ से खुदाई कर रहे थे। लगातार बारिश के कारण जमीन पहले ही कमजोर हो चुकी थी और अचानक हुए धंसाव ने पूरे खनन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। मृतकों में खनिकों के अलावा बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, जो आसपास के बाजारों और सहायक गतिविधियों से अपनी आजीविका चलाते थे।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कुछ लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है, लेकिन कई की हालत गंभीर बनी हुई है। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया, हालांकि लगातार बारिश, अस्थिर जमीन और सीमित संसाधनों के कारण अभियान में भारी कठिनाइयां आ रही हैं। प्रांतीय अधिकारियों ने शुक्रवार शाम तक कम से कम 227 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन खोज अभियान जारी रहने के साथ यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई गई है।

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रुबाया खदान राजधानी गोमा से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है और वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में इसका अहम स्थान है। यह खदान दुनिया के करीब 15 प्रतिशत कोल्टन उत्पादन के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। कोल्टन से टैंटलम धातु तैयार की जाती है, जिसका उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर, एयरोस्पेस उपकरणों और गैस टर्बाइन जैसे उच्च तकनीकी उत्पादों में होता है।

स्थानीय मजदूरों का कहना है कि खदान में काम करने वाले अधिकांश लोग बेहद कम मजदूरी पर अत्यंत जोखिम भरे हालात में काम करते हैं। सुरक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीक का अभाव आम बात है। हादसे से पहले इलाके में तेज बारिश हुई थी, जिसके तुरंत बाद भूस्खलन हुआ और कई लोग जिंदा दफन हो गए।

यह क्षेत्र पहले से ही गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से यह खनन इलाका एक सशस्त्र विद्रोही समूह के नियंत्रण में है, जिससे प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा मानक कमजोर पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध या अर्ध-कानूनी खनन, कमजोर नियमन और चरम मौसम की स्थितियां मिलकर इस तरह की त्रासदियों को जन्म देती हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से कांगो के खनन क्षेत्रों में कामकाजी परिस्थितियों में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि वैश्विक तकनीकी उद्योग की खनिज मांग का सबसे बड़ा बोझ स्थानीय मजदूरों और समुदायों को उठाना पड़ता है। रुबाया खदान की यह त्रासदी एक बार फिर खतरनाक खनन प्रथाओं और कमजोर निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सहायता देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। राहत दलों का कहना है कि जब तक बारिश थमती नहीं और जमीन स्थिर नहीं होती, तब तक बचाव कार्य पूरी क्षमता से चलाना मुश्किल रहेगा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मौसम और बिगड़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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