भुवनेश्वर | साइबर पुलिस ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए संगठित साइबर ठगी चलाने के आरोप में एक सैलून संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सैलून संचालक को इस पूरे रैकेट का प्रमुख योजनाकार और संचालनकर्ता माना जा रहा है, जिसने ऊंचे और निश्चित मुनाफे का लालच देकर निवेशकों को निशाना बनाया।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ऐसे नकली ट्रेडिंग ऐप तैयार किए और प्रचारित किए, जो दिखने में पूरी तरह वैध निवेश प्लेटफॉर्म जैसे प्रतीत होते थे। पीड़ितों को फर्जी डैशबोर्ड, मनगढ़ंत मुनाफे के आंकड़े और झूठा ट्रेडिंग रिकॉर्ड दिखाकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से शिकायतें मिली हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह ठगी केवल एक शहर तक सीमित नहीं थी। कई शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने जैसे ही बड़े अमाउंट ट्रांसफर किए, उनके खातों से पैसे निकालने की सुविधा बंद कर दी गई।
सेवानिवृत्त कर्मचारी भी बना शिकार
जांच से जुड़े एक प्रमुख मामले में भुवनेश्वर के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को करोड़ों रुपये के रिटर्न का लालच दिया गया था। शुरुआती चरण में पीड़ित ने कई किस्तों में रकम ट्रांसफर की और अंततः वह करीब एक करोड़ रुपये गंवा बैठा।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में पीड़ित को छोटे अमाउंट निकालने की अनुमति दी गई, ताकि उसका भरोसा जीता जा सके। यह तरीका ऑनलाइन निवेश घोटालों में आम तौर पर अपनाया जाता है। जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ी, आरोपियों का संपर्क कम होता गया और अंततः पीड़ित का फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर एक्सेस पूरी तरह बंद कर दिया गया।
शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस ने डिजिटल फॉरेंसिक जांच, बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण और संचार रिकॉर्ड की गहन पड़ताल शुरू की, जिसके बाद तीन आरोपियों की पहचान की गई।
गिरोह के भीतर तय भूमिकाएं
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से बंटी हुई थी। एक आरोपी के जिम्मे ऐसे बैंक खातों का संचालन था, जिनके जरिए पीड़ितों से बड़ी मात्रा में रकम प्राप्त और स्थानांतरित की जाती थी।
दूसरे आरोपी पर आरोप है कि उसने एक वैध व्यवसाय से जुड़े करंट अकाउंट का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को आगे भेजा, ताकि लेनदेन को वैध दिखाया जा सके। तीसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़ितों और गिरोह के अन्य सदस्यों के बीच समन्वय का काम करता था और पैसों के ट्रांसफर की निगरानी करता था।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क की संरचना से साफ है कि ठगी को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें कई खातों और बिचौलियों के जरिए लेनदेन की परतें बनाई गईं।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
साइबर पुलिस ने पुष्टि की है कि इसी तरह की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतें कई राज्यों में दर्ज हुई हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आरोपियों ने अपने भौगोलिक दायरे से बाहर भी निवेशकों तक पहुंच बनाई।
जांच एजेंसियां अब अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय कर यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट से और कितने लोग जुड़े थे तथा फर्जी ऐप्स के तकनीकी विकास और संचालन में किसकी भूमिका रही।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी से हासिल की गई रकम को किसी अन्य संपत्ति या व्यवसाय में तो नहीं लगाया गया।
जनता के लिए चेतावनी, जांच जारी
अधिकारियों ने आम लोगों को आगाह किया है कि वे अनजान स्रोतों से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों या बिना सत्यापन वाले ट्रेडिंग ऐप्स से दूर रहें। उन्होंने दोहराया कि वैध निवेश प्लेटफॉर्म कभी भी गारंटीड या असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का वादा नहीं करते।
फिलहाल जांच जारी है और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर चल रहे संगठित साइबर ठगी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है।
