अमेरिका में रिटर्न रिफंड विवाद: अमेज़न ₹25,600 करोड़ के सेटलमेंट पर सहमत

Team The420
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सिएटल| अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न ने लौटाए गए सामान पर कथित तौर पर रिफंड न देने से जुड़े एक बड़े क्लास एक्शन मुकदमे को निपटाने के लिए 309 मिलियन डॉलर (करीब ₹25,600 करोड़) के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। वॉशिंगटन राज्य की एक संघीय अदालत ने इस समझौते को मंज़ूरी दे दी है, जिससे लाखों ग्राहकों को भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।

यह मुकदमा 2023 में दायर किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अमेज़न ने कई मामलों में लौटाए गए उत्पादों पर रिफंड जारी नहीं किया या बाद में ग्राहकों से दोबारा राशि वसूल ली, जबकि रिटर्न कंपनी की नीति के अनुसार किया गया था। वादियों का कहना था कि इन प्रथाओं से उपभोक्ताओं को वर्षों तक “अनुचित और भारी आर्थिक नुकसान” झेलना पड़ा।

यह सेटलमेंट यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जमाल व्हाइटहेड ने सिएटल में मंज़ूर किया। समझौता उन ग्राहकों पर लागू होगा जिन्होंने सितंबर 2017 से अब तक अमेज़न से खरीदारी की थी।

कौन होंगे पात्र

क्लास एक्शन के दायरे में वे ग्राहक शामिल हैं जिन्हें रिटर्न के बावजूद पूरा रिफंड नहीं मिला या जिन्हें बाद में चार्ज कर दिया गया। अदालत में दाखिल दस्तावेज़ों के अनुसार, जिन दावों को मंज़ूरी मिलेगी, उन ग्राहकों को बकाया पूरी रिफंड राशि के साथ ब्याज भी मिलने की उम्मीद है।

वादी पक्ष के वकीलों का कहना है कि नकद भुगतान, ब्याज और गैर-नकद लाभों को मिलाकर यह समझौता उपभोक्ताओं को 1 अरब डॉलर (करीब ₹83,000 करोड़) से अधिक का कुल लाभ प्रदान करेगा।

अमेज़न ने आरोपों से किया इनकार

सेटलमेंट फाइलिंग में अमेज़न ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक रिटर्न पॉलिसी से सहमत होते हैं, जिसमें तय समय सीमा में सही प्रोडक्ट वापस न आने पर चार्ज लगाए जाने का प्रावधान होता है।

हालांकि, कंपनी ने लंबी कानूनी लड़ाई और बढ़ते खर्च से बचने के लिए इस मामले को सुलझाने का फैसला किया।

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अदालती रिकॉर्ड में शामिल एक बयान में अमेज़न के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 में आंतरिक समीक्षा के दौरान कुछ ऐसे मामलों की पहचान हुई, जहां रिफंड की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई या सही आइटम वापस न मिलने के कारण रिफंड रोका गया।

रिटर्न सिस्टम में बदलाव भी शामिल

₹25,600 करोड़ के नकद सेटलमेंट के अलावा, अमेज़न को अपने रिटर्न और रिफंड सिस्टम में सुधार भी करने होंगे। अदालत में दाखिल दस्तावेज़ों के मुताबिक, कंपनी ने नीतियों और प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए 363 मिलियन डॉलर (करीब ₹30,000 करोड़) से अधिक खर्च करने पर सहमति दी है, ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों की संभावना कम हो।

वादी पक्ष के वकीलों का कहना है कि ये सुधार उपभोक्ता संरक्षण को मज़बूत करेंगे और इसी तरह के विवादों की पुनरावृत्ति रोकने में मदद करेंगे।

इस समझौते के तहत, क्लास एक्शन के वकील 100 मिलियन डॉलर (करीब ₹8,300 करोड़) तक की कानूनी फीस की मांग कर सकते हैं, जिसे अदालत की मंज़ूरी मिलना अभी बाकी है।

प्राइम से जुड़ा अलग मामला भी जारी

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेज़न पहले से ही अमेज़न प्राइम से जुड़े एक अलग सेटलमेंट के तहत अरबों डॉलर का भुगतान कर रहा है। उस केस में आरोप था कि कंपनी ने ग्राहकों को भ्रामक तरीके से प्राइम में शामिल किया और मेंबरशिप रद्द करना मुश्किल बनाया।

अमेज़न ने उस मामले में भी आरोपों से इनकार किया है, लेकिन नियामकीय दबाव के बाद सेटलमेंट पर सहमति जताई।

आगे क्या होगा

पात्र ग्राहकों को आने वाले महीनों में रिफंड प्रक्रिया और दावे से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। कुछ मामलों में भुगतान ऑटोमैटिक हो सकता है, जबकि अन्य ग्राहकों को दावा सबमिट या कन्फर्म करना पड़ सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेटलमेंट बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती न्यायिक और नियामकीय निगरानी को दर्शाता है, खासतौर पर ऑटोमेटेड बिलिंग और रिफंड सिस्टम को लेकर।

अमेज़न के लिए यह समझौता रिटेल और सब्सक्रिप्शन बिज़नेस से जुड़े हाई-प्रोफाइल कानूनी विवादों की सूची में एक और अध्याय जोड़ता है, भले ही कंपनी अपनी कारोबारी नीतियों का बचाव करती रहे।

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