मुंबई | छह वर्षों तक चली एकल कानूनी लड़ाई के बाद, विद्याविहार (पश्चिम) के एक फ्लैट मालिक ने महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल (MahaREAT) से एक ऐसा आदेश हासिल किया है, जिसे रियल एस्टेट नियमन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने नीलकंठ किंगडम प्रोजेक्ट के डेवलपर्स को निर्देश दिया है कि वे 60 दिनों के भीतर पूरे प्रोजेक्ट का RERA पंजीकरण कराएं।
यह आदेश MahaREAT के 18 जून 2019 के पूर्व निर्णय को पलटता है, जिसमें केवल शेष सुविधाओं के RERA पंजीकरण की अनुमति दी गई थी। ताजा फैसले में ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा प्रोजेक्ट मानते हुए RERA के तहत पंजीकृत किया जाना अनिवार्य है, जिससे नियामक कानून की पकड़ और मजबूत होती है।
कानूनी व्याख्या और फैसले का महत्व
फ्लैट मालिक की ओर से पेश वकील ने कहा कि MahaREAT ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जहां Completion Certificate (CC) या Occupation Certificate (OC) लंबित हैं और प्रोजेक्ट अधूरा है, वहां उसे सक्रिय प्रोजेक्ट माना जाएगा और RERA पंजीकरण से छूट नहीं दी जा सकती।
वकील के अनुसार,
“यह फैसला RERA कानून की मूल भावना को मजबूती देता है और यह सुनिश्चित करता है कि डेवलपर्स केवल इस आधार पर जवाबदेही से बच न सकें कि खरीदारों को कानून लागू होने से पहले कब्जा दे दिया गया था।”
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का महाराष्ट्र भर के प्री-RERA अधूरे प्रोजेक्ट्स पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
नीलकंठ किंगडम प्रोजेक्ट: देरी और अधूरे वादे
मामले की अपीलकर्ता स्तुति गलिया, एन. के. अवंती सीएचएस की फ्लैट मालिक हैं। उनका कहना है कि नीलकंठ किंगडम प्रोजेक्ट में सात आवासीय इमारतें शामिल हैं, जो लीज पर ली गई जमीन पर विकसित की जा रही थीं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2005 में हुई थी और फ्लैट खरीदारों को 2008 तक कब्जा देने का वादा किया गया था।
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हालांकि, डेवलपर्स के बीच आंतरिक विवादों और कानूनी अड़चनों के कारण यह प्रोजेक्ट 2010 तक ठप रहा। वर्ष 2012-13 तक इमारतें संरचनात्मक रूप से तैयार हो गईं, लेकिन फ्लैट मालिकों को केवल फिट-आउट पजेशन दिया गया। क्लब हाउस, स्विमिंग पूल और अन्य साझा सुविधाएं अधूरी ही रहीं।
अकेली अपील और 11 डेवलपर्स के खिलाफ संघर्ष
यह अपील MahaREAT में अकेले फ्लैट मालिक द्वारा दायर की गई थी। लगभग 499 अन्य फ्लैट मालिकों और सात हाउसिंग सोसाइटियों ने इस कानूनी लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया।
स्तुति गलिया ने 11 डेवलपर्स, जिनमें से कई बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां थीं, के खिलाफ अकेले मुकदमा लड़ा। छह साल तक चली यह कानूनी प्रक्रिया अंततः एक ऐसे आदेश पर पहुंची, जिसने यह दिखाया कि व्यक्तिगत स्तर पर लड़ा गया संघर्ष भी नियामक ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
RERA के लिए निहितार्थ
इस फैसले के बाद, अधूरे प्रोजेक्ट्स पर RERA की भूमिका और अधिकार क्षेत्र और अधिक स्पष्ट हो गया है। अब डेवलपर्स को न केवल निर्माण पूरा करने की जिम्मेदारी निभानी होगी, बल्कि सभी फ्लैट खरीदारों के वैधानिक अधिकारों और साझा सुविधाओं की जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश भविष्य में उन मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जहां अधूरे प्रोजेक्ट्स को आंशिक पंजीकरण के जरिए नियमन से बाहर रखने की कोशिश की जाती रही है।
