नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो गैस बिल अपडेट कराने के बहाने मोबाइल फोन में फर्जी APK फाइल इंस्टॉल कराकर पीड़ितों के बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिक्की मंडल उर्फ विक्की (आसनसोल, पश्चिम बंगाल), सुमित कुमार सिंह (जामताड़ा, झारखंड) और राजीव कुमार मंडल के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 318(4), 319 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की शिकायत के आधार पर की गई, जिनके खाते से आरोपियों ने फर्जी ऐप इंस्टॉल कराकर ₹91,449 की राशि निकाल ली थी।
कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को IGL का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे और गैस बिल अपडेट या बकाया भुगतान का हवाला देते थे। इसके बाद वे पीड़ित को एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहते थे, जिसे IGL का आधिकारिक ऐप बताया जाता था। जैसे ही पीड़ित ऐप इंस्टॉल करता, वह अनजाने में फोन की अहम परमिशन दे देता, जिससे आरोपी OTP पढ़ने, स्क्रीन एक्सेस करने और बैंकिंग ऐप्स की जानकारी हासिल कर लेते थे।
नामी संस्थानों के नाम पर बनाए गए फर्जी ऐप
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से कुल नौ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। डिजिटल फोरेंसिक जांच में सात फोन में कई फर्जी ऐप पाए गए, जो IGL, SBI, RTO चालान और टाटा पावर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर डिजाइन किए गए थे। इन ऐप्स का उद्देश्य केवल उपयोगकर्ताओं का भरोसा जीतकर उनकी बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाना था।
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35 साइबर शिकायतों से जुड़े तार
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 35 अलग-अलग साइबर शिकायतों से जुड़े हुए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, बिक्की मंडल पहले भी आसनसोल में साइबर फ्रॉड के मामलों में शामिल रहा है। वहीं, सुमित कुमार सिंह के खिलाफ झारखंड में धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराध दर्ज हैं। राजीव कुमार मंडल भी सह-आरोपियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
APK फाइल क्या होती है
APK (Android Package Kit) एंड्रॉयड मोबाइल ऐप का इंस्टॉलेशन पैकेज होता है। जैसे कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए .exe फाइल होती है, उसी तरह एंड्रॉयड फोन में ऐप इंस्टॉल करने के लिए APK फाइल का इस्तेमाल किया जाता है। साइबर ठग फर्जी या छेड़छाड़ की गई APK फाइल बनाकर उसे KYC अपडेट, बिल भुगतान, इनाम या सरकारी ऐप के नाम पर भेजते हैं। एक बार इंस्टॉल होने पर यह ऐप फोन का नियंत्रण ठगों को सौंप देता है।
IGL की चेतावनी
IGL के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता को कनेक्शन काटने या बकाया भुगतान को लेकर कोई कॉल आती है, तो उसे IGL कार्यालय या कॉल सेंटर से पुष्टि जरूर करनी चाहिए। भुगतान हमेशा आधिकारिक चैनल के जरिए ही करें और किसी के कहने पर कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें।
ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
- गूगल प्ले स्टोर के बाहर से कोई ऐप इंस्टॉल न करें
- अनजान लिंक या APK फाइल पर क्लिक न करें
- फोन में ‘Unknown Sources’ विकल्प बंद रखें
- किसी ऐप को अनावश्यक परमिशन न दें
- संदेह होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज को नजरअंदाज न करने की अपील की है। मामले की आगे की जांच जारी है।
