ED ने अनिल अंबानी समूह की ₹1,885 करोड़ की नई संपत्तियां कुर्क कीं, कुल अटैचमेंट ₹12,000 करोड़ के करीब

Team The420
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नई दिल्ली | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों की ₹1,885 करोड़ मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस ताज़ा कार्रवाई के बाद समूह से संबंधित मामलों में अब तक कुल कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य लगभग ₹12,000 करोड़ तक पहुंच गया है। यह कार्रवाई बैंक ऋण धोखाधड़ी और सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच के तहत की गई है।

ED के अनुसार, यह कुर्की चार अलग-अलग अस्थायी अटैचमेंट आदेशों के माध्यम से की गई है, जो रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL), यस बैंक, और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े मामलों से संबंधित हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए सार्वजनिक धन का कपटपूर्ण डायवर्जन किया गया।

कुर्क की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की BSES यमुना पावर लिमिटेड, BSES राजधानी पावर लिमिटेड और मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी शामिल है। इसके अतिरिक्त ₹148 करोड़ की बैंक जमा राशि, ₹143 करोड़ की बकाया प्राप्तियां, तथा रिलायंस समूह से जुड़ी अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों को भी अटैच किया गया है। ED ने समूह के दो वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम पर दर्ज आवासीय संपत्तियों और शेयर व म्यूचुअल फंड निवेशों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया है।

एजेंसी ने बताया कि इससे पहले भी रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों की ₹10,117 करोड़ से अधिक की संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं। इनमें विभिन्न अचल संपत्तियां, बैंक बैलेंस, शेयरहोल्डिंग और अन्य निवेश शामिल थे। दिसंबर 2025 में भी ED ने लगभग ₹1,120 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क किया था।

यस बैंक निवेश जांच के केंद्र में

ED के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में लगभग ₹2,965 करोड़ और RCFL में करीब ₹2,045 करोड़ का निवेश किया था। दिसंबर 2019 तक ये निवेश नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन गए। उस समय RHFL पर करीब ₹1,353.50 करोड़ और RCFL पर ₹1,984 करोड़ की बकाया राशि थी।

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जांच एजेंसी का दावा है कि RHFL और RCFL को ₹11,000 करोड़ से अधिक का सार्वजनिक धन प्राप्त हुआ था। ED के अनुसार, यस बैंक के माध्यम से यह धन रिलायंस समूह की कंपनियों तक पहुंचा। आरोप है कि इससे पहले रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से भी बड़ी मात्रा में धन आया था, लेकिन नियामकीय प्रतिबंधों के कारण उसे सीधे समूह की फाइनेंस कंपनियों में निवेश नहीं किया जा सका। ऐसे में कथित तौर पर धन को यस बैंक के जरिए घुमावदार रास्ते से भेजा गया।

ऋण, डायवर्जन और ‘एवरग्रीनिंग’ के आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि 2010–12 के बाद से RCom और उसकी समूह कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से बड़े पैमाने पर ऋण लिया, जिसमें से लगभग ₹40,185 करोड़ अब भी बकाया है। एजेंसी के अनुसार, नौ बैंकों ने समूह के कुछ ऋण खातों को फ्रॉड घोषित किया है।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि समूह की कंपनियों ने करीब ₹13,600 करोड़ का उपयोग ऋण की एवरग्रीनिंग के लिए किया, जबकि ₹12,600 करोड़ से अधिक की राशि संबंधित या जुड़ी इकाइयों को ट्रांसफर की गई। इसके अलावा ₹1,800 करोड़ से अधिक रकम फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेशों में लगाई गई।

आगे की राह

ED का कहना है कि मौजूदा कुर्की अस्थायी प्रकृति की है और जांच जारी है। संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस कार्रवाई का असर समूह की वित्तीय स्थिति के साथ-साथ बैंकिंग और निवेश जगत पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।

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