हैदराबाद | तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) ने कई उच्च-मूल्य साइबर ठगी मामलों में अंतर-राज्यीय समन्वित कार्रवाई करते हुए केरल और बेंगलुरु से छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में हैदराबाद के पीड़ितों को कुल मिलाकर ₹16 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। जांच में सामने आया है कि ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मनोवैज्ञानिक दबाव के हथकंडे अपनाए और म्यूल अकाउंट नेटवर्क के जरिए रकम को आगे बढ़ाया।
एक साथ की गई छापेमारी में केरल और बेंगलुरु से तीन-तीन आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार लोगों में पाँच ऐसे बैंक खाता धारक शामिल हैं, जिनके खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने में किया गया, जबकि एक एजेंट ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के लिए धन के प्रवाह को सुगम बनाया। बरामद मोबाइल फोनों और बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
TRAI-CBI-RBI बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’, ₹5.66 करोड़ की ठगी
दिसंबर 2024 में दर्ज एक मामले में एक वरिष्ठ नागरिक महिला से ₹5.66 करोड़ की ठगी की गई। ठगों ने खुद को TRAI, CBI और RBI का अधिकारी बताकर संपर्क किया और दावा किया कि पीड़िता का आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का हवाला देते हुए पीड़िता और उनकी बेटियों को स्काइप के जरिए लगातार निगरानी में रखा गया।
इस दौरान नकली CBI और RBI लोगो वाले दस्तावेज़ भेजे गए। मानसिक दबाव के बीच 13 नवंबर से 3 दिसंबर के बीच RTGS के जरिए बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई, जिसमें समय से पहले फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ना भी शामिल था। ठगी तब उजागर हुई जब पीड़िता कोटी स्थित CBI कार्यालय पहुंचीं और दस्तावेज़ों के फर्जी होने की जानकारी मिली।
इस मामले में केरल के पथानामथिट्टा जिले के व्यवसायी रेन्जु पठक्कु (30) को गिरफ्तार किया गया, जिसने अपनी कंपनी का बैंक खाता म्यूल अकाउंट के रूप में उपलब्ध कराया। जांच के दौरान उसका मोबाइल फोन जब्त किया गया।
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ब्लू डार्ट कॉल से डर, ₹7.12 करोड़ की साइबर ठगी
27 अक्टूबर 2025 को दर्ज दूसरे मामले में एक वरिष्ठ नागरिक पुरुष से ₹7.12 करोड़ की ठगी की गई। शुरुआत ब्लू डार्ट के नाम से आए एक व्हाट्सऐप कॉल से हुई, जिसमें कथित तौर पर अवैध वस्तुओं से भरे पार्सल का आरोप लगाया गया। इसके बाद खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले कॉल आए, गंभीर अपराधों का डर दिखाया गया और गोपनीयता बनाए रखने को कहा गया। दबाव में पीड़ित ने रकम ट्रांसफर कर दी।
इस कड़ी में केरल से अरुण श्रीनिवास (41), जो डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल है, और सनल वी मेनन (48), बैंकिंग-फाइनेंस कंसल्टेंट, को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर कमीशन के बदले अपने बैंक खातों को ठगी की रकम प्राप्त करने देने का आरोप है। इनके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए।
IPO और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ₹3.40 करोड़ की ठगी
तीसरा मामला ऑनलाइन ट्रेडिंग और IPO ठगी से जुड़ा है, जिसमें बेगमपेट के एक व्यवसायी को ₹3.40 करोड़ का नुकसान हुआ। 2 अक्टूबर 2025 को व्हाट्सऐप पर खुद को ‘स्टॉक मार्केट प्रोफेसर’ बताने वाले व्यक्ति ने कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ऊंचे रिटर्न का वादा किया। शुरुआती दिनों में छोटे मुनाफे दिखाकर 22 दिनों में पीड़ित से ₹3.40 करोड़ से अधिक निवेश करा लिया गया।
निकासी की कोशिश पर अतिरिक्त रकम की मांग होने पर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में बेंगलुरु से वी. जयप्रकाश (43), बलराजू (51)—दोनों Zip Cleaning Services Pvt Ltd के निदेशक—और बलराजू जी. (55), एक व्यवसायी, गिरफ्तार किए गए। आरोप है कि इन्होंने कंपनी खातों और लिंक्ड मोबाइल फोनों का दुरुपयोग कर रकम मुख्य ठगों तक पहुंचाई। तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर चेतावनी
TGCSB ने नागरिकों से अपील की है कि वे कमीशन, टैक्स या कानूनी परेशानी से बचाने के नाम पर किसी को भी बैंक खाता या क्रेडेंशियल साझा न करें। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे प्रस्ताव साइबर ठगी और मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का आम हथकंडा हैं, जिनके जरिए ठग बड़ी रकम को तेजी से आगे बढ़ाते हैं।
