नई दिल्ली | केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले घरेलू बॉन्ड बाजार पर दबाव के संकेत तेज़ हो गए हैं। सरकारी उधारी के अनुमानित आंकड़ों ने निवेशकों और बाजार सहभागियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार के आकलन के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में केंद्र और राज्य सरकारों की कुल बॉन्ड सप्लाई ₹30 लाख करोड़ से अधिक हो सकती है। ग्रामीण रोजगार योजना में हालिया बदलावों के बाद राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को इस दबाव की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
नई विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन योजना के तहत अब राज्यों को पहले की तुलना में अधिक खर्च वहन करना होगा। इसका सीधा असर उनकी उधारी आवश्यकताओं पर पड़ने की आशंका है। बाजार सहभागियों का मानना है कि इसका परिणाम राज्य विकास ऋण (SDL) की भारी आपूर्ति के रूप में सामने आ सकता है, जिससे बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बना रहेगा।
FY27 में ₹30.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है कुल सप्लाई
अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में कुल सरकारी बॉन्ड सप्लाई करीब ₹30.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है। इसमें केंद्र सरकार की उधारी लगभग ₹16.5 लाख करोड़ और राज्य सरकारों की उधारी ₹14 लाख करोड़ के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है। चालू वित्त वर्ष के अंत तक ही कुल बॉन्ड सप्लाई ₹27 लाख करोड़ के करीब पहुंचने का अनुमान है, जिसमें राज्यों की हिस्सेदारी ₹12.45 लाख करोड़ होगी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में सफलता पाई है, लेकिन इसका दबाव राज्यों की बैलेंस शीट पर साफ दिखाई दे रहा है। रोजगार योजनाओं का बढ़ता भार राज्यों पर डालने से उन्हें अतिरिक्त उधारी का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे केंद्र और राज्यों दोनों की बॉन्ड सप्लाई एक साथ बाजार में आने का दबाव बनेगा।
RBI पहले ही जता चुका है चिंता
भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट भी इस रुझान की पुष्टि करती है। RBI के अनुसार, पिछले दो दशकों में राज्यों की बाजार से उधारी में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में ही राज्यों की उधारी में करीब 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ा है और निजी क्षेत्र तथा केंद्र सरकार के लिए संसाधन जुटाने की गुंजाइश सीमित हुई है।
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FY27 में ₹5.5 लाख करोड़ के बॉन्ड होंगे मैच्योर
अगले वित्त वर्ष में लगभग ₹5.5 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड मैच्योर होने वाले हैं। बाजार जानकारों के मुताबिक, यदि RBI के पास रखे बॉन्ड बड़ी मात्रा में मैच्योर होते हैं, तो नकदी की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इससे निपटने के लिए केंद्रीय बैंक लंबी अवधि के बॉन्ड में स्विच ऑपरेशन या सरकार की ओर से अल्पकालिक ट्रेजरी बिल जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
घाटा नियंत्रण में, लेकिन दबाव बरकरार
एसेट मैनेजमेंट फर्मों का अनुमान है कि FY27 में सरकार का राजकोषीय घाटा लगभग 4.3 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। इसके बावजूद भारी बॉन्ड मैच्योरिटी और नई उधारी के चलते कुल सप्लाई का स्तर ऊंचा बना रहेगा। इसका मतलब यह है कि घाटा नियंत्रण में रहने के बावजूद बॉन्ड बाजार पर दबाव कम होने की संभावना सीमित है।
RBI पर बढ़ती निर्भरता
बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्टों के अनुसार, मांग-आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने के लिए हाल के वर्षों में बॉन्ड बाजार की निर्भरता RBI पर बढ़ी है। घरेलू बचत दर में गिरावट और केंद्र व राज्यों दोनों की बढ़ती उधारी ने हालात को और जटिल बना दिया है। जब तक घरेलू और विदेशी निवेश के नए स्रोत नहीं खुलते, बाजार पर दबाव बने रहने की आशंका है।
यील्ड ऊंची रहने के संकेत
इन तमाम कारकों के बीच बाजार सहभागियों का मानना है कि महंगाई में नरमी और ब्याज दरों में संभावित कटौती के बावजूद भारी बॉन्ड सप्लाई यील्ड को नीचे आने से रोकेगी। अनुमान है कि 10-साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.60 से 6.70 प्रतिशत के दायरे में बनी रह सकती है। फिलहाल RBI के सक्रिय हस्तक्षेप के बिना बॉन्ड बाजार को बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।
