नई दिल्ली | Amazon एक बार फिर बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी में है। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी अगले सप्ताह से करीब 14,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों की नौकरियां खत्म करेगी। यह अक्टूबर 2025 के बाद दूसरी बड़ी छंटनी होगी और इसके साथ ही कुल नियोजित कटौती लगभग 30,000 नौकरियों तक पहुंच जाएगी। तीन दशक के इतिहास में यह Amazon की अब तक की सबसे बड़ी लेऑफ प्रक्रिया मानी जा रही है।
आगामी छंटनी का पैमाना अक्टूबर में हुई कटौती के लगभग बराबर बताया जा रहा है, जब कंपनी ने करीब 14,000 व्हाइट-कॉलर पद खत्म किए थे। इस बार भी क्लाउड सर्विसेज, रिटेल ऑपरेशंस, स्ट्रीमिंग कंटेंट और मानव संसाधन से जुड़े विभागों में कर्मचारियों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
पहले इन छंटनियों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते असर से जोड़ा गया था, लेकिन अब कंपनी ने अपना रुख बदला है। Amazon का कहना है कि यह फैसला न तो लागत घटाने के लिए है और न ही ऑटोमेशन की वजह से, बल्कि इसका उद्देश्य संगठन की कार्य-संस्कृति को दुरुस्त करना, प्रबंधन की परतें कम करना और अत्यधिक नौकरशाही को खत्म करना है।
यह कटौती Amazon के लगभग 3.5 लाख कॉर्पोरेट कर्मचारियों का करीब 10% हिस्सा है। हालांकि, कंपनी के कुल 15.8 लाख कर्मचारियों के मुकाबले यह आंकड़ा 2% से भी कम बैठता है, क्योंकि अधिकांश कर्मचारी वेयरहाउस, डिलीवरी और फुलफिलमेंट नेटवर्क से जुड़े हैं।
छंटनी का समय इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि Amazon का कारोबार फिलहाल मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। कंपनी के भीतर भी यह स्वीकार किया गया है कि अच्छे नतीजों के बीच नौकरियों में कटौती विरोधाभासी लग सकती है। लेकिन आंतरिक स्तर पर यह तर्क दिया जा रहा है कि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कम पदानुक्रम, छोटे दल और ज़िम्मेदारी की स्पष्ट संरचना ज़रूरी है।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
इस पुनर्गठन का एक अहम हिस्सा संगठन को ‘फ़्लैट’ बनाना है। इसी के तहत Amazon ने सप्ताह में पांच दिन कार्यालय से काम करने की अनिवार्यता लागू की है, जिसे टेक इंडस्ट्री की सबसे सख्त रिटर्न-टू-ऑफिस नीतियों में गिना जा रहा है। कंपनी को उम्मीद थी कि इससे बड़ी संख्या में कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसके बाद प्रत्यक्ष छंटनी का रास्ता अपनाया गया।
अक्टूबर में प्रभावित कर्मचारियों को 90 दिन का समय दिया गया था ताकि वे कंपनी के भीतर नई भूमिका तलाश सकें या बाहर अवसर खोज सकें। यह अवधि इस सप्ताह समाप्त हो रही है। आगामी छंटनी में भी कर्मचारियों को सेवेरेंस पैकेज, करियर ट्रांज़िशन सहायता और बढ़ी हुई हेल्थ बेनिफिट्स दिए जाने की संभावना है।
कंपनी ने आंतरिक प्रक्रियाओं की पहचान के लिए एक गुमनाम फीडबैक सिस्टम भी शुरू किया है। आंतरिक संचार के अनुसार, इस पहल के तहत 1,500 से अधिक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिनके आधार पर सैकड़ों प्रक्रियागत बदलाव किए गए हैं, ताकि कामकाज को सरल और तेज़ बनाया जा सके।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि AI-आधारित बदलावों से लेकर संस्कृति सुधार तक Amazon का बदलता बयान टेक कंपनियों की उस चुनौती को दर्शाता है, जिसमें उन्हें नवाचार और कर्मचारियों की स्थिरता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। बीते दो वर्षों में कई बड़ी टेक कंपनियों ने भारी छंटनियां की हैं, जबकि AI और नई तकनीकों में निवेश जारी रखा है।
आलोचकों का मानना है कि बार-बार पुनर्गठन से कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ती है और मनोबल पर असर पड़ता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि तेज़ी से बदलते बाज़ार में टिके रहने के लिए ऐसे कठोर फैसले जरूरी हो जाते हैं। यह कदम टेक इंडस्ट्री में उभरते उस रुझान को भी रेखांकित करता है, जहां आकार से ज़्यादा दक्षता और गति को प्राथमिकता दी जा रही है।
आने वाले हफ्तों में Amazon के कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है, जबकि पूरी इंडस्ट्री इस बात पर नज़र रखेगी कि क्या यह सांस्कृतिक पुनर्गठन कंपनी को वह फुर्ती दे पाता है, जिसकी उसे तलाश है।
