देहरादून में साइबर ठगी का जाल गहराया: पटेलनगर और रायपुर बने सबसे बड़े हॉटस्पॉट

Team The420
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देहरादून | डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ देहरादून में साइबर ठगी एक गंभीर कानून-व्यवस्था और सामाजिक चुनौती बन चुकी है। वर्ष 2025 के दौरान साइबर अपराधियों ने जिले में ₹23.38 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया। राहत की बात यह रही कि पुलिस और संबंधित एजेंसियों की मदद से ₹5.30 करोड़ की राशि पीड़ितों को वापस दिलाई जा सकी, जबकि शेष रकम की रिकवरी अभी भी जांच के दायरे में है।

आंकड़ों के अनुसार, पटेलनगर थाना क्षेत्र साइबर ठगी का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। यहां से 1,439 लोगों ने ठगी की शिकायतें दर्ज कराईं। दूसरे स्थान पर रायपुर थाना क्षेत्र रहा, जहां 1,214 लोग साइबर अपराधियों का शिकार बने। इन दोनों इलाकों में बड़ी संख्या में रिटायर कर्मचारी और सीनियर सिटीजन रहते हैं, जिन्हें ठग अक्सर आसान लक्ष्य मानते हैं।

पटेलनगर और रायपुर के बाद नेहरू कॉलोनी में 1,154 और ऋषिकेश क्षेत्र में 1,045 मामलों की शिकायतें दर्ज हुईं। यह तस्वीर बताती है कि साइबर ठगी अब सीमित इलाकों या उम्र वर्ग तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तेजी से फैल रही है।

शिकायतों का अंबार, जांच में चुनौतियां

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, पूरे वर्ष जिले से 11,378 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में कुल ₹23.38 करोड़ की राशि ठगों के खातों में ट्रांसफर हुई। जांच के दौरान ठगों तक पहुंचने के लिए 1,357 नोटिस जारी किए गए, जिनमें से 878 नोटिसों की तामील हो सकी।

हालांकि, 724 शिकायतकर्ताओं को पुलिस मैनुअल रूप से ट्रेस नहीं कर पाई, जिससे कई मामलों में जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इसके अलावा ₹1.80 करोड़ की राशि ठगों के खातों में फ्रीज कराई गई है, जिसे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ितों को लौटाने की तैयारी है।

ठगी के बदलते तरीके

जांच और साइबर विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराना, शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच, क्रेडिट कार्ड और बीमा पॉलिसी रिन्यूअल के बहाने जानकारी हासिल करना, फर्जी अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग, और पार्सल-कोरियर फ्रॉड जैसे तरीके सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापन, वर्क-फ्रॉम-होम ऑफर और अनजान लिंक लोगों को तेजी से फंसा रहे हैं। कई मामलों में ठग खुद को बैंक, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताकर भरोसा जीत लेते हैं।

Future Crime Research Foundation की चेतावनी

साइबर अपराध पर काम करने वाली Future Crime Research Foundation (FCRF) ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि भारत के मिड-साइज शहरों में साइबर ठगी का खतरा बड़े महानगरों जितना ही गंभीर हो चुका है। फाउंडेशन के अनुसार, सीनियर सिटीजन और डिजिटल रूप से कम जागरूक वर्ग सबसे अधिक जोखिम में हैं।

FCRF का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने और शुरुआती घंटों में बैंक खातों को फ्रीज कराने से 60–70 प्रतिशत मामलों में नुकसान को सीमित किया जा सकता है। संस्था ने राज्य सरकारों और पुलिस से स्थानीय स्तर पर डिजिटल जागरूकता अभियान तेज करने की सिफारिश की है।

पुलिस और विशेषज्ञों की साझा अपील

पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान कॉल, लिंक और APK फाइल से दूर रहें, सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख बंद कर भरोसा न करें और ऑनलाइन बैंकिंग या केवाईसी से जुड़ी किसी भी कॉल को पहले सत्यापित करें।

किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है, ताकि रकम को समय रहते फ्रीज कराया जा सके।

सतर्कता ही समाधान

देहरादून के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि साइबर ठगी अब संगठित और तेजी से फैलता अपराध बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ जन-जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी ही इस खतरे से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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