रायपुर | केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारत माला परियोजना के तहत प्रस्तावित रायपुर–विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं के मामले में छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने तीन पूर्व पटवारियों के खिलाफ पहली पूरक चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी के अनुसार, इन कथित कृत्यों से सरकारी खजाने को लगभग ₹40 करोड़ का प्राथमिक नुकसान हुआ है।
यह पूरक चार्जशीट रायपुर स्थित विशेष अदालत में प्रस्तुत की गई है। आरोपितों की पहचान दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे के रूप में हुई है, जिन्हें इस मामले में 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। एसीबी ने बताया कि इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोजन चलाया जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण में कथित हेरफेर
एसीबी की जांच के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान कुछ सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के बीच आपराधिक साजिश रची गई। इस साजिश के तहत भूमि रिकॉर्ड में बैकडेटेड बंटवारे, फर्जी नामांतरण (म्यूटेशन) और कागजी तौर पर कृत्रिम भूखंड विभाजन दर्शाया गया, ताकि अधिग्रहण के समय मुआवजा राशि को बढ़ाया जा सके।
जांच में सामने आया है कि जिन जमीनों का अधिग्रहण प्रस्तावित था, उन्हें रिकॉर्ड में छोटे-छोटे प्लॉट्स में विभाजित दिखाया गया। इससे मुआवजे की गणना में हेरफेर हुआ और भुगतान की राशि कई गुना बढ़ गई। एसीबी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध और संगठित तरीके से अंजाम दी गई।
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आरोपियों की भूमिका और अनुमानित नुकसान
पूरक चार्जशीट में तीनों आरोपियों की भूमिका का अलग-अलग विवरण दिया गया है।
दिनेश पटेल पर आरोप है कि उसने भूमि सुधार और फॉर्म-10 से जुड़ी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करते हुए अधिग्रहित भूमि का कृत्रिम विभाजन दिखाया। एसीबी के अनुसार, इससे सरकार को ₹30.82 करोड़ का कथित नुकसान हुआ।
लेखराम देवांगन पर आरोप है कि उसने मूल खसरा नंबरों को फर्जी उप-विभागों के रूप में दर्शाकर अधिक मुआवजा दिलाने में भूमिका निभाई। इस कृत्य से लगभग ₹7.16 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
बसंती घृतलहरे पर भी इसी प्रकार की रिकॉर्ड हेराफेरी का आरोप है, जिससे सरकार को ₹1.67 करोड़ का कथित नुकसान हुआ।
जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
एसीबी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल पहली पूरक चार्जशीट है और मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है और आने वाले समय में और नाम सामने आ सकते हैं।
भारत माला परियोजना देश में आर्थिक गलियारों, राष्ट्रीय राजमार्गों और लॉजिस्टिक नेटवर्क को सुदृढ़ करने की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण से जुड़े इस कथित घोटाले ने प्रशासनिक निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अब विशेष अदालत में इस मामले की आगे की सुनवाई होगी, जहां आरोप तय होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
