सस्ता सोना, नकली नोट और पुलिसिया दबाव: अंबेडकरनगर में ₹2 लाख की ठगी का पर्दाफाश

Team The420
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अंबेडकरनगर | उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में सस्ता सोना दिलाने के नाम पर ₹2 लाख की ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई के लिए पहुंचे पुलिसकर्मियों पर ही धमकाने और मामला दबाने के आरोप लगे, जिसके बाद जांच में दो सिपाहियों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

यह मामला राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के देवचंदपुर गांव से जुड़ा है। पीड़ित शिवम मिश्रा, जो गोरखपुर के निवासी हैं, ने बताया कि उनका संपर्क देवचंदपुर के वीरेंद्र वर्मा और प्रमोद सिंह से हुआ था। दोनों ने उन्हें सस्ता सोना दिलाने का प्रस्ताव दिया और 50 ग्राम सोना ₹2 लाख में देने की बात तय हुई। सौदे के लिए 13 जनवरी को देवरिया बाजार में मिलने का समय तय किया गया।

तय समय पर शिवम मिश्रा ₹2 लाख नकद लेकर मौके पर पहुंचे। आरोप है कि प्रमोद सिंह और वीरेंद्र वर्मा ने रकम लेने के बाद उन्हें एक बैग सौंपा और जल्दबाजी में वहां से निकल गए। कुछ समय बाद जब शिवम ने बैग खोला, तो उसमें सोने के बजाय नकली नोट भरे हुए मिले। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने तुरंत डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।

पीड़ित का आरोप है कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे डायल 112 में तैनात सिपाही आदर्श यादव और अनिल यादव ने मदद करने के बजाय उन्हें ही धमकाना शुरू कर दिया। शिवम के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने नकली नोटों की तस्करी का डर दिखाकर जेल भेजने की बात कही और उन्हें भयभीत कर वहां से भगा दिया, जिससे वह तत्काल कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करा सके।

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घटना के बाद शिवम गोरखपुर लौट गए और वहां पुलिस विभाग में कार्यरत अपने एक रिश्तेदार को पूरी घटना बताई। रिश्तेदार के प्रोत्साहन पर 23 जनवरी को वह दोबारा अंबेडकरनगर पहुंचे और राजेसुल्तानपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू की गई।

जांच में आरोप सही पाए जाने पर ठगी में शामिल प्रमोद सिंह के साथ-साथ डायल 112 में तैनात सिपाही आदर्श यादव और अनिल यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इनके खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी देने सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। गिरफ्तार दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ठगी की साजिश पहले से रची गई थी और सोने की डील के बहाने नकली नोटों से भरा बैग सौंपने की योजना बनाई गई थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि नकली नोट कहां से लाए गए और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

फिलहाल वीरेंद्र वर्मा और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हैं और शिकायत के बावजूद पीड़ित को पुलिसिया दबाव झेलने के आरोपों ने कानून-व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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